समीरा रेड्डी
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समीरा ने कहा, 'क्या हुआ अगर लोग कुछ सोचेंगे? क्या इससे लगेगा कि मैं बूढ़ी हो गई हूं?, सुंदर नहीं हूं, तैयार नहीं हूं? आकर्षक नहीं हूं? मैंने इस बारे में बात करते हुए कि कहा कि, 'मैं पागल नहीं हूं जैसे पहले हुआ करती थी और ये मुक्त होने की आजादी है। पहले में हफ्ते में दो बार अपने बाल रंगा करती थी जिससे की सफेद बाल ना दिखें। अब मैं वक्त निकालती हूं और जब मेरा मन करता है तब मैं बालों को रंगती हूं या नहीं रंगती हूं'। मेरे पिता ने कहा कि मैं ही क्यों इन रुढ़िवादिता को बदलने के बारे में सोच रही हूं तो मैंने कहा कि मैं क्यों नहीं सोच सकती?