सब मोह माया है
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फिल्म ''सब मोह माया है' में अनुकंपा नियुक्ति जैसे गंभीर विषय को निर्देशक अभिनव पारीक ने एक कटाक्ष के रूप में पेश किया है। एक पिता अपने बच्चों की परवरिश किसी भी हाल में कर लेता है। अपनी छोटी-छोटी खुशियों को नजरअंदाज करके एक -एक पाई जोड़कर अपने बच्चे को इस काबिल बनाता है, ताकि उसके बच्चे भविष्य में अपने पैर पर खड़े होकर उसके बुढ़ापे का सहारा बने। लेकिन जब रिटायरमेंट की अवस्था आती है, तो वहीं बच्चे कहते हैं कि जीते जी तो कुछ किए ही नहीं, अब मरकर ही हमारा भला कर दो, ताकि हम अपने परिवार की देखभाल कर सकें।