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Nirupa Roy: अमिताभ बच्चन की 'मां' को सचमुच की देवी मान पैर छूते थे लोग, बुढ़ापे में आई थी जेल जाने की नौबत

Wed, 13 Oct 2021 11:38 AM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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निरूपा रॉय - फोटो : सोशल मीडिया
बॉलीवुड में अपनी बेमिसाल एक्टिंग से कई कीर्तिमान स्थापित कर चुकीं अभिनेत्री निरूपा राय की आज पुण्यतिथि है। 4 जनवरी, 1931 को गुजरात के वलसाड में जन्मी निरूपा 13 अक्तूबर 2004 को हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़कर चली गईं। 

40 पौराणिक फिल्मों में किया काम
निरूपा रॉय का बचपन में नाम था कोकिला किशोरचंद्र बलसारा। निरूपा रॉय ने बॉलीवुड में मां के किरदार को बेहद खास बनाया था। अपने पांच दशक के लंबे करियर में उन्होंने 275 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उन्होंने  हर प्रकार की फिल्मों में काम किया, फिर वह चाहे सामाजिक हो, इतिहासिक या फिर पौराणिक। निरूपा रॉय ने अपने करियर में 40 पौराणिक फिल्मों में काम किया, जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है। अपने करियर की शुरुआत में कई फिल्मों में निरूपा रॉय ने देवी के रोल किए। और इसलिए लोग उन्हें सच में देवी समझ कर घर तक आशीर्वाद लेने आने लगते थे।
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nirupa roy - फोटो : Social Media
निरूपा के पिता किशोर चंद्र बलसारा रेलवे में कर्मचारी थे। उनके माता-पिता उन्हें प्यार से 'छीबी' कहकर बुलाते थे। निरूपा जब स्कूल में थीं तभी उनके पिता ने उनकी शादी कमल रॉय से कर दी। उस वक्त निरूपा महज 14 साल की थीं। शादी के बाद 1945 में वो अपने पति के साथ मुंबई आ गईं। निरूपा के पति कमल रॉय राशन इंस्पेक्टर की नौकरी कर रहे थे। वो एक्टर बनने की ख्वाहिश रखते थे और इसलिए ऑडिशन देते रहते थे। शादी के बाद कमल निरूपा को लेकर एक गुजराती फिल्म के लिए ऑडिशन देने गए। इत्तेफाक से कमल को इस फिल्म के लिए रिजेक्ट कर दिया गया और निरूपा को फिल्म में लीड एक्ट्रेस के तौर पर कास्ट कर लिया गया।
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Nirupa Roy - फोटो : twitter
कुछ गुजराती फिल्में करने के बाद निरूपा को पहला हिंदी सिनेमा में ब्रेक मिला 1946 में आई फिल्म ‘अमर राज’ से। 1950 में आई फिल्म ‘हर हर महादेव’ में निरूपा की किस्मत चमक गई।निरूपा ने फिल्म तो कर ली लेकिन मध्यम वर्गी परिवार में उस समय लड़कियों का फिल्में करना खराब माना जाता था। उनकी एक्टिंग की खबर ने घर में कोहराम मचा दिया था। यहां तक की उनके पिता ने तो उनसे मरते दम तक बात नहीं की थी। 

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Nirupa Roy - फोटो : twitter
निरूपा ने अपना फिल्मी सफर जारी रखा। साल 1951 में आई फिल्म 'हर हर महादेव' में उनके पार्वती के किरदार को लोगों ने काफी पसंद किया। इसके अलावा फिल्म 'वीर भीमसेन' में द्रौपदी के रोल में लोग उनकी एक्टिंग के कायल हो गए। त्रिलोक कपूर के साथ इनकी जोड़ी सबसे ज्यादा हिट रही। दोनों ने एक साथ 18 फिल्मों में काम किया। 1953 में उनकी हिट फिल्म दो बीघा जमीन आई। इस फिल्म ने उन्हें हिन्दी सिनेमा की हिट हीरोइन के रूप में पहचान दी।
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nirupa roy - फोटो : Social Media
1975 में रिलीज हुई यश चोपड़ा की फिल्म 'दीवार' उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इस फिल्म में निरूपा ने अमिताभ और शशि की मां का रोल निभाया। उनके किरदार को इस कदर पसंद किया गया कि उस दौर की बहुत सी फिल्मों में निरूपा मां के ही रोल में नजर आईं। दीवार के बाद निरूपा 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिंकदर', 'अमर अकबर एंथोनी', 'सुहाग', 'इंकलाब', 'गिरफ्तार', 'मर्द' और 'गंगा-यमुना-सरस्वती' में भी वो अमिताभ के मां के रोल में ही दिखाई दीं। जवानी में जितना फेम निरूपा रॉय को नहीं मिल पाया, उससे कहीं ज्यादा उन्हें बाद में मिला यानी मां के रोल निभाकर।
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nirupa roy - फोटो : social media
जब विवादों में आईं निरूपा रॉय
साल 2001 में दहेज मांगने के जुर्म में निरूपा रॉय गिरफ्तार होते-होते बची थीं। दरअसल उनकी बहू ऊना रॉय ने उनपर दहेज उत्पीड़न का केस कर दिया था। फिल्मों में मां के किरदार से बेहतरीन छाप छोड़ने वालीं निरूपा राय को साल 2004 में हार्ट अटैक आया और वह दुनिया को अलविदा कह गईं। निरूपा रॉय को 2004 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला।
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