मनस्वी
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फिल्म ‘मनस्वी’ के निर्देशक मनोज ठक्कर इस बारे में बताते हैं, ‘धर्म सनातन है, वह हमेशा था, है और रहेगा। धर्म का अर्थ देश, काल और परिस्थिति के आधार पर अलग-अलग शब्दों में, रूपों में प्रकट होता आ रहा है और आगे भी होता रहेगा। शिव के अघोर स्वरुप और तंत्र को लेकर जो समाज में भ्रांतियां हैं, उनकी जीवनशैली को लेकर, साधना को लेकर, उन्हें फिल्म ‘मनस्वी’ के जरिये पेश करने की हमने कोशिश की है। यंत्र, तंत्र, मंत्र शब्दों का उच्चारण मात्र निषेधात्मक विषय और विचारों का द्योतक है, परंतु इनका असल, गहन, ज्ञानात्मक स्वरूप तो कुछ और ही है, हमने उसी पर काम किया है।’