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Pankaj Tripathi Interview: ईश्वर सबके साथ नहीं रह सकता, वह माता-पिता के रूप में मिलता है

Sun, 14 Jan 2024 10:47 AM IST
रुपाली रामा जायसवाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न  पंकज त्रिपाठी की इस साल की पहली फिल्म 'मैं अटल हूं' अगले हफ्ते रिलीज हो रही है। फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बने पंकज बाजपेयी से एक खास बातचीत।
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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
बीते साल सिनेमाघरों में ‘फुकरे 3’ और ‘ओएमजी 2’ में अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने वाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी की इस साल की पहली फिल्म 'मैं अटल हूं' अगले हफ्ते रिलीज हो रही है। फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बने पंकज से एक खास बातचीत।
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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'मैं अटल हूं' के लिए निर्माता विनोद भानुशाली का प्रस्ताव आने पर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

दरअसल, मैं समझ ही नहीं पाया कि क्या प्रतिक्रिया दूं। प्रस्ताव के साथ उन्होंने मुझे एक फोटो दिखाया जो मेरा ही था लेकिन मैं पहचान नहीं पाया कि वह मैं ही हूं। उन्होंने अटलजी के गेटअप में मेरा वह फोटो कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से बनाया था। मेरे मन में पहला ख्याल यही आया कि क्या मैं इस किरदार को निभाने के योग्य हूं? मैंने पूरी ईमानदारी के साथ अपना काम किया है, इसका मूल्यांकन मैं दर्शकों पर छोड़ता हूं।
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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कभी अटल बिहारी वाजपेयी को सुनने या देखने का मौका मिला?

मैं अटलजी का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं। उनको सुनने पटना के गांधी मैदान की दो रैलियों में जाना मुझे अब भी याद है। उनकी बायोपिक करने का सबसे बड़ा खतरा यही मुझे समझ आया कि कहीं मैं उनकी मिमिक्री करता यानी नकल उतारता न दिखूं। बतौर अभिनेता मैं उनका व्यक्तित्व जी सकता हूं। उनके विचार पकड़ सकता हूं लेकिन उनकी आवाज? वह मैं नहीं निकाल सकता। मैं अटल जैसा दिख नहीं सकता, अटल जैसा सुनाई नहीं दे सकता लेकिन, हां अभिनय के जरिये मैंने ये करने की पूरी कोशिश की है कि 'मैं अटल हूं'। अटलजी को लोगों ने देखा है। मैं उन जैसा नहीं बन सकता। फिल्म देखकर लोगों करुणा और देशभक्ति का भाव जगे, बस यही हमारी कोशिश है।

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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

विकास के नवोन्मेष का पहला काम अटल बिहारी वाजपेयी ने किया, आपका अपना अनुभव उनके कार्यों को लेकर क्या रहा है?

अद्भुत ही रहा है। परमाणु परीक्षण से लेकर हाईवे के निर्माण और नदियों को आपस में जोड़ने तक की सारी योजनाएं कालजयी हैं। अब मैं चंदेरी में 'स्त्री 2' की शूटिंग करने के लिए मुंबई से ग्वालियर तक सीधे हवाई जहाज से पहुंच सकता हूं। दिल्ली से कन्याकुमारी तक हाईवे का सफर भी किया है। विकास को लेकर उनकी परिकल्पना अद्भुत रही है।

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मैं अटल हूं-पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अटल के व्यक्तित्व निर्माण में उनके माता पिता का बड़ा योगदान रहा, क्या इसे फिल्म में दिखाया गया है?

हां, इस पक्ष को हमने फिल्म में दिखाया है। उनके बचपन की कुछ निर्णायक घटनाएं हैं, लेकिन अटलजी का समूचा व्यक्तित्व और कृतित्व दो घंटे की फिल्म में समेट पाना बहुत मुश्किल है। फिल्म में ऐसी घटनाओं का चयन किया गया है कि अगर उसे एक धागे में पिरो दिया जाए तो एक कहानी सी लगे।

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पंकज त्रिपाठी-मैं अटल हूं - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इस फिल्म के बाद अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर आपके नजरिये में कोई बदलाव आया क्या?

अभी तो मैं उनको इतना ज्यादा जान गया हूं कि पूरी एक किताब लिख सकता हूं। और, यह अनुभव अब मेरे साथ जीवन पर्यंत रहने वाला है। वह देश के महान नेता रहे हैं। उनके बारे में जानकर, उनके बारे में पढ़कर और उनके कृतित्व को परदे पर निभाकर अब वह मेरी दृष्टि में और महान हो गए हैं। मुझे लगता था कि मैं उनके बारे में सब जानता हूं लेकिन ये फिल्म करने के बाद मैंने जाना कि मैं अटलजी के बारे में कितना कम जानता था! यही अनुभव इस फिल्म को देखने के बाद दर्शकों को भी होगा।

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मैं अटल हूं - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, सुना कि आप फिल्म ‘मैं अटल हूं’ की पूरी शूटिंग के दौरान खिचड़ी खाकर रहे?

हमने फिल्म ‘मैं अटल हूं’ की शूटिंग लखनऊ में उन दिनों में की है जब वहां का तापमान 47 डिग्री तक पहुंच जाता था। शूटिंग के दौरान मेकअप के साथ साथ प्रोस्थेटिक का भी इस्तेमाल होता था और उसके व त्वचा के बीच पसीना जमा होने पर बहुत खराब लगता था। डर लगा रहता था कि तबियत खराब न हो तो रोज खिचड़ी ही खाता था। खुद ही एकदम सादी खिचड़ी बनाता था। ये तो आपको पता ही होगा कि अटलजी का भी प्रिय भोजन खिचड़ी ही था। 

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विनोद भानुशाली-पंकज त्रिपाठी, मैं अटल हूं - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आपकी पत्नी मृदुला ने आपके जीवन के संघर्ष में आपका हर पल साथ दिया है। फिल्म 'मैं अटल हूं' तक आकर अब वह कितना हल्का महसूस करती हैं?

मेरी पत्नी मृदुला का साथ मेरे जीवन का अनमोल उपहार है। वह न होतीं तो न जाने मैं कहां होता। हमने संघर्ष साथ साथ झेला है। अब सुख भी साथ साथ ही महसूस कर रहे हैं। लेकिन, मेरी कमान अब भी उनके ही हाथ में रहती है। मेरी सारी बातें, मुलाकातों उनसे होकर ही मुझ तक आती हैं। मेरे जीवन का पूरा आयोजन और प्रयोजन मदुला त्रिपाठी के हाथों में है। तब संघर्ष में व्यवस्था करने का धन नहीं था। अब सफलता में इसे आयोजित करने का समय नहीं है।
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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, पिताजी की कमी कितनी खलती है, इस सबके बीच?

ईश्वर सबके साथ नहीं रह सकता तो वह माता-पिता के रूप में मिलता है। मां मुंबई में हमारे साथ रहें, ऐसी हम सबकी इच्छा है लेकिन, मुंबई में उनका मन नहीं लगता। उन्हें एयर कंडीशनर की हवा नहीं, सीधे पेड़ों से आने वाली हवा अच्छी लगती है। बाबूजी हर पल मेरी स्मृति में रहते हैं। उनकी स्मृति में शिक्षा के क्षेत्र में कुछ कुछ प्रयास करता रहता हूं। किसी भी बच्चे को शिक्षित और कुशल बनाकर हम समाज में सबसे बड़ा योगदान कर सकते हैं।
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