पंकज त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, पिताजी की कमी कितनी खलती है, इस सबके बीच?
ईश्वर सबके साथ नहीं रह सकता तो वह माता-पिता के रूप में मिलता है। मां मुंबई में हमारे साथ रहें, ऐसी हम सबकी इच्छा है लेकिन, मुंबई में उनका मन नहीं लगता। उन्हें एयर कंडीशनर की हवा नहीं, सीधे पेड़ों से आने वाली हवा अच्छी लगती है। बाबूजी हर पल मेरी स्मृति में रहते हैं। उनकी स्मृति में शिक्षा के क्षेत्र में कुछ कुछ प्रयास करता रहता हूं। किसी भी बच्चे को शिक्षित और कुशल बनाकर हम समाज में सबसे बड़ा योगदान कर सकते हैं।