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इन गानों की बदौलत 'कव्वाली के शहंशाह' कहे गए नुसरत फतेह अली खान, संगीत से इश्क करा देंगे उनके ये गाने, सुनिए

Sun, 16 Aug 2020 02:48 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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नुसरत फतेह अली खान - फोटो : Social Media
नुसरत फतेह अली खान की आवाज के अनूठेपन और रूहानियत को चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता है। नुसरत फतेह अली खान की आवाज और शब्दों का जादू कुछ ऐसा है जो एक बार सुन ले वो बस उन्हीं का हो जाता है। 16 अगस्त यानी आज के दिन कव्वाली के शहंशाह कहे जाने वाले नुसरत फतेह अली खान की पुण्यतिथि होती है। भारत से ताल्लुक रखने वाले नुसरत फतेह अली खान भले ही पाकिस्तानी कव्वाल थे, लेकिन हिंदुस्तान में उन्हें काफी प्यार मिला। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम लेकर आए हैं उनके कुछ सदाबहार गाने।
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ये जो हल्का-हल्का सुरूर है....

आज भी नुसरत फतेह अली खान की आवाज कानों में पड़ती हैं, तो बहुत से लोग मंत्रमुग्ध होकर उनकी गायकी में खो जाते हैं। 

 
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'मेरे रश्के कमर...'

ये गाना आज किसी की जुबान से उतरने का नाम ही नहीं लेता लेकिन कम ही लोगो को पता होगा कि सबसे पहले ये गाना उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने गाया था। 
 

'पिया रे-पिया रे...' 

'पिया रे-पिया रे...' से तो वो हर तरफ छा गए। आज नुसरत फतेह अली खान के चाहने वालों की कोई कमी नहीं क्योंकि जब ये लम्बी तान ले कर गाते थे तो दुनिया ठहर जाती थी।
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'इश्क दा रुतबा'

1999 में आई फिल्म 'कारतूस' में 'इश्क दा रुतबा' गाना भी नुसरत फतेह अली खान की आवाज में था जो लोगों को काफी पसंद आया।
 
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मैंने पत्थर से जिनको बनाया सनम....

नुसरत उन बहुत कम लोगो में से है जिन्हे जीते जी इतनी महोब्बत नहीं मिली जितनी जिंदगी से रुखसती के बाद मिली। 
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