विकास खन्ना
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रसोई में पहली बार बचपन में आपने अपनी दादी के लिए चाय बनाई और उनका दिल जीत लिया। खाने का आत्मा से रिश्ता कितना अहम है?
जो आपके बड़े हैं, उनको पता है कि वह आपको हराना नहीं चाहते। चाय नहीं भी अच्छी बनी होगी तो उनको तो यही कहना था कि मैंने ऐसी चाय जिंदगी में कभी नहीं पी। लेकिन, मेरे मन में सवाल यही रहा कि ये चाय बीजी (दादी) जैसी क्यों नहीं बनती। मैं महसूस करता हूं खाने का रिश्ता दिल के साथ बहुत गहरा है। यही वह रिश्ता है जो सीधे हमें हमारे बचपन में ले जाता है। याद आते हैं वे सारे पल जब पूरा परिवार एक साथ होता था। सब तंदुरुस्त थे, रिश्तों में दीवारे नहीं थीं। और, ये सब आपको खाना याद दिलाता है।