रणवीर बरार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जब आप ने शेफ बनने का मन बनाया तो घर वालों की क्या प्रतिक्रिया थी?
हम लोग जिस पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं, वहां पर लोग डॉक्टर और इंजीनियर बनने के अलावा कुछ सोचते ही नहीं हैं। मैं 1993 की बात कर रहा हूं। उस समय लोगों को समझाना बहुत मुश्किल होता था कि इस प्रोफेशन में आना है। क्योंकि उस समय इस प्रोफेशन में आने के लिए लोग बहुत कम सोचते थे। घर वालों को जब इसके बारे में बताया तो उन्होंने यही कहा कि खाना वगैरह बनाते रहिएगा, लेकिन यह बताइए कि काम क्या करेंगे? शेफ के प्रोफेशन में करियर बनाया जा सकता है, यह कोई सोचता ही नहीं था। मुझे अपने घर वालों को इस बारे में समझाने में काफी वक्त लगा।