अमिताभ बच्चन के साथ मनोज बाजपेयी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मनोज बाजपेयी के किरदारों में उनके प्रशंसक अक्सर एक बात नोट करते हैं और वह ये कि वह जो भी किरदार करते हैं, उसके जैसे ही बन जाते हैं, ऐसा कैसे? मनोज बताते हैं, ‘अगर आपने किसी किरदार की जिंदगी को शूटिंग पर आने से पहले काफी बार जी लिया है। उसका चरित्र आपके रोम रोम में समाया हुआ है, स्क्रिप्ट आपके जेहन में पूरी तरीके से बस चुकी है। तो मेरे लिहाज़ से चीजें पहुंच पाती हैं वहां तक। अगर वो वहां तक पहुंच नहीं रही हैं फिर लगता है कहीं ना कहीं दिक्कत है आपकी तकनीक में। आप कुछ लाइनें बोलकर जा सकते हैं, कुछ वाहवाही भी मिल जाएगी उसमें लेकिन आप कुछ योगदान दे नहीं रहे हैं अपने क्षेत्र में। अपने अभिनय से आगे जाकर कुछ करना है तो इतनी मशक्कत तो करनी ही पड़ेगी।’