मनोज बाजपेयी
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ये पूछे जाने पर कि नए दौर के राजकुमार राव जैसे अभिनेता जब उन्हें अपना आदर्श बताते हैं और उनकी फिल्मे देखकर कथानक आधारित सिनेमा में किस्मत आजमाने आते हैं तो कैसा लगता है? मनोज बाजपेयी कहते हैं, “अभिनय में किसी और को देखकर आना तो ठीक है लेकिन यहां सिर्फ हौसला ही काम नहीं आता। अभिनय एक तपस्या है। मुझे ढाई दशक से ज्यादा हो गए हैं, यहां मेहनत करते हुए और अब भी मेरा संघर्ष जारी ही है। यहां तमाम तरह के संघर्ष हैं, काम पाने का संघर्ष तो है ही इसके अलावा संघर्ष अपने काम को लोगों तक पहुंचाने का, सही लोगों के बीच आपकी बात सही तरह से सुने जाने का संघर्ष भी चलता रहता है। मैं कह सकता हूं कि आज जहां मैं हूं, वह स्थान मैंने बहुत संघर्षों से पाया है और अब संघर्ष इस स्थान को बनाए रखने का भी जारी ही है।”