मैक मोहन
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क्रिकेटर बनने का सपना लेकर मुंबई आए मैक रंगमंच से जुड़ गए और फिर उन्होंने ठान लिया कि वो अभिनेता ही बनेंगे। 1964 में चेतन आनंद की फिल्म 'हकीकत' से उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री की। इसके बाद उन्होंने 'जंजीर', 'सलाखें', 'शागिर्द', 'सत्ते पे सत्ता', 'डॉन', 'दोस्ताना', 'काला पत्थर' जैसी कई फिल्मों से अपने अभिनय का हुनर साबित किया। हालांकि उन्हें असली पहचान मिली थी फिल्म शोले के सांभा के रूप में। इस फिल्म में उन्होंने सिर्फ एक ही डायलॉग बोला, 'पूरे पचास हजार' और उनका किरदार हमेशा हमेशा के लिए अमर हो गया।