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के एन सिंह: बैरिस्टरी से टूटा मोह तो पकड़ ली फिल्मों की राह, बर्लिन ओलंपिक में भी हुए थे चयनित

Wed, 26 May 2021 09:12 AM IST
अमरीन हुसैन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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के एन सिंह - फोटो : Social media

नाम- कृष्ण निरंजन सिंह
पहली फिल्म- 'सुनहरा संसार'
आखिरी फिल्म- 'अजूबा'
जन्म- 1 सितंबर 1908
निधन- 31 जनवरी 2000

बॉलीवुड अभिनेता के एन सिंह फिल्मों के एक ऐसे विलेन रहे, जिन्होंने अपनी नजर भर से दर्शकों के मन में खौफ भर दिया। जेंटलमैन की तरह रहने वाले केएन सिंह चीखे-चिल्लाए बिना ही केवल आंखों की हलचल से लोगों में भय पैदा कर देते थे। इनका पूरा नाम कृष्ण निरंजन सिंह था, जिनका जन्म 1 सितंबर 1908 को देहरादून में हुआ था। के एन सिंह गुजरे जमाने के ऐसे विलेन रहे, जिन्होंने खूब नाम कमाया और खलनायिकी को एक नया अंदाज दिया। उनके पिता चंडी प्रसाद सिंह कभी नहीं चाहते थे कि उनका बेटा फिल्म लाइन में जाए। योजना तो ये थी कि के एन सिंह बड़े होकर अपने पिता की ही तरह बैरिस्टर बनेंगे। वो अंग्रेजों का दौर था और के एन सिंह भी लंदन जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई करना चाहते थे।

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के एन सिंह - फोटो : Social media

बैरिस्टरी से टूटा मोह

के एन सिंह ने लखनऊ से हाई स्कूल की पढ़ाई की। इनका एक खास विषय लैटिन था। एक बार ये कोर्ट में बैठे देख रहे थे कि एक मुजरिम, जिसने कत्ल किया था उसे बचा लिया गया। उस मुजरिम का केस लड़ने वाला कोई नहीं बल्कि उनके पिता ही थे। अन्याय को देखकर उनका मन बैरिस्टरी से हट गया।

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के एन सिंह - फोटो : Social media

बर्लिन ओलंपिक के लिए चुने गए

के एन सिंह एथलीट भी थे और अच्छी खासी वेट लिफ्टिंग भी किया करते थे। उस समय वो बर्लिन ओलंपिक के लिए चुने गए थे, लेकिन बहन की बीमारी के कारण नहीं जा सके। वहीं, इनका मन आर्मी ज्वाइन करने का भी था। ये सारे प्लान और खेलकूद उस वक्त बदल गए जब उनकी किस्मत उन्हें फिल्मों में ले आई।

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के एन सिंह - फोटो : Social media

फिल्म ‘सुनहरा संसार’ से की शुरुआत

एक बार के एन सिंह को बहन के इलाज के लिए कोलकाता जाना पड़ा। यहां उनकी मुलाकात हुई पृथ्वीराज कपूर से। वो इनके पारिवारिक मित्र भी थे। पृथ्वीराज कपूर ने के एन सिंह की मुलाकात मशहूर फिल्म हस्ती देबकी बोस से करवाई। देबकी बोस ने फिल्म 'सुनहरा संसार' में उन्हें डॉक्टर का किरदार दिया। ये बात 1936 की है। यहीं से के एन सिंह के फिल्मी करियर की शुरुआत हुई। कोलकाता में ही रहते हुए इन्होंने लगभग 4 फिल्मों में काम किया। 'हवाई डाकू', 'आनंत आश्रम', 'विद्यापति' में वो अभिनय को निखारते रहे।

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'चलती का नाम गाड़ी' के एक दृश्य में के एन सिंह - फोटो : Social media

बिना सीखे ही बने मशहूर विलेन

फिल्म निर्देशक ए आर करदार के एन सिंह को कोलकाता से मुंबई ले आये। इसके बाद के एन सिंह धीरे-धीरे मशहूर विलेन बन गए। उन्होंने अभिनय का कोई प्रशिक्षण नहीं लिया था, लेकिन उन्हें जो किरदार मिलता था वह उसपर खूब मेहनत करते थे।फिल्म 'इंस्पेक्टर' में वो एक ड्राइवर बने थे। उस किरदार को निभाने के लिए इन्होंने काफी विक्टोरिया ड्राइवर से बातें की।

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'हावड़ा ब्रिज' में मधुबाला के साथ के एन सिंह - फोटो : Social media

रूसी भाषा के जानकार थे के एन सिंह

अभिनेता ने राज कपूर की भी कुछ फिल्मों में काम किया। 'बरसात' और 'आवारा' में उन्होंने अच्छी एक्टिंग की थी। फिल्म 'आवारा' रूस में खूब चली थी। के एन सिंह एकमात्र कलाकार थे जिन्होंने अपने डायलॉग खुद रूसी भाषा में डब किये थे। बाकी कलाकार ऐसा नहीं कर पाए थे। इनका बॉलीवुड करियर काफी लंबा रहा। अपने स्टाइल के लिए ये के एन मशहूर रहे।

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के एन सिंह - फोटो : Social media

लगभग 250 फिल्मों में किया काम

अपने फिल्मी करियर में के एन सिंह ने लगभग 250 फिल्मों में काम किया। इनमें 'हाथी मेरे साथी', 'झूठा कहीं का', 'मेरे जीवन साथी', ‘लोफर’, 'मजबूर', 'काला सोना', 'अदालत', 'रफू चक्कर', 'दोस्ताना', 'एजेंट विनोद' और 'कालिया' जैसी कई फिल्में की थीं। अपनी आंखों के लिए मशहूर के एन सिंह जीवन के अंतिम सालों में अपनी आंखों की रोशनी खो चुके थे। मोतियाबिंद के मामूली ऑपरेशन में उनकी आंखे खराब हो गई थीं और दिखना बंद हो गया था। 31 जनवरी 2000 को मुंबई में उनका निधन हुआ।

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