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Jewish Actors in Bollywood: मिलिए इस्राइली मूल के 10 सिने दिग्गजों से, आजाद भारत की पहली मिस इंडिया भी यहूदी

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बॉलीवुड के यहूदी दिग्गज - फोटो : अमर उजाला
‘ये मेरा दीवानापन है, या मोहब्बत का सुरूर....’, अभिनेता दिलीप कुमार पर फिल्माया गया पार्श्वगायक मुकेश के चंद बेहतरीन गानों में शुमार ये गाना फिल्म ‘यहूदी’ (1958) का है। आगा हश्र कश्मीरी के नाटक ‘यहूदी की लड़की’ पर बनी निर्देशक बिमल रॉय की इस फिल्म से पहले इसी नाटक पर दो फिल्में और भी बन चुकी थीं। यहूदियों का हिंदी सिनेमा से तब का नाता रहा है जब हिंदुस्तानी महिलाओं का फिल्मों में काम काम करना ‘गुनाह’ माना जाता था। जी हां, परदे पर कामोत्तेजक दृश्य करने से लेकर आधुनिक शैली की वेशभूषाओं में दिखने का काम मूक फिल्मों के दौर में इस्राइली मूल की अभिनेत्रियों ने खूब किया। और, जब देश को आजादी मिली तो जो युवती पहली मिस इंडिया बनी, वह भी इस्राइली मूल की ही युवती ही रही। ये भी दिलचस्प ही है कि देश की पहली बोलती फिल्म भी एक इस्राइली लेखक की ही लिखी हुई है।
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रोमिला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
भारतीय सिनेमा का पहला परिवार
मूक फिल्मों के दौर में इस्राइली अभिनेत्रियों ने हिंदुस्तानी सिनेमा में खूब जलवे रोशन किए। भले उनको हिंदी या उर्दू न आती थी, लेकिन उनका सौंदर्य इन मूक फिल्मों के खूब काम आया। रोमिला, प्रमिला और रोज को भारतीय सिनेमा का पहला परिवार भी माना जाता है। मशहूर नाटककार आगा हश्र कश्मीरी ने ही रोमिला का सिनेमा से परिचय कराया। ‘रिमझिम’, ‘दो बातें’, ‘साइकिल वाली’ और ‘चाबुक वाली’ उनकी चर्चित फिल्में रहीं।
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प्रमिला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आजाद भारत की पहली मिस इंडिया
रोमिला की बहन प्रमिला का मूल नाम एस्थर विक्टोरिया अब्राहम है। देश के आजाद होने के बाद पहली मिस इंडिया का खिताब इन्होंने ही जीता। दोनों बहनों का परिवार कलकत्ता में रहता था और प्रमिला को जो पहली नौकरी सिनेमा में मिली वह थी सिनेमाघरों में रील बदलने के दौरान लगने वाले समय के बीच दर्शको को शांत रखना। उन दिनों सिनेमाघरों में सोलो रील वाला ही प्रोजेक्टर हुआ करता था और एक रील खत्म होने के बाद दूसरी रील प्रोजेक्टर रोककर चढ़ानी पड़ती थी। फिल्मों में आने पर प्रमिला पर फिल्माए गए गाने ‘चोली के अंदर’ को लेकर तब खूब बवाल मचा था। रोमिला को भारत की पहली महिला फिल्म निर्माता भी माना जाता है। हैदर अली से विवाह करने के बाद प्रमिला मुंबई में ही जमी रहीं।

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रोज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
चर्चित नर्तकी रहीं रोज
रोमिला और प्रमिला की चचेरी बहन रोज मुसलीह ने भी मूक सिनेमा के दौर में एक चर्चित नर्तकी के रूप में खूब नाम कमाया। रोज ने ‘कसौटी’ जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया और उनकी शोहरत एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में होती गई जिनके नृत्य पर सिनेमा के शौकीन लगातार फिदा रहे।
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सुलोचना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पहली सुपरस्टार सुलोचना
भारतीय सिनेमा में सबसे ज्यादा फीस पाने वाली पहली अदाकारा का तमगा भी यहूदी मूल की अभिनेत्री रूबी मेयर्स के नाम रहा है। हिंदी सिनेमा में वह सुलोचना के नाम से मशहूर हुईं। फिल्म ‘हमारा हिंदुस्तान’ में अपने चुंबन दृश्य को लेकर वह 1930 में खूब चर्चा में रहीं। इसके पहले सुलोचना की फिल्म ‘वाइल्ड कैट ऑफ बॉम्बे’ खूब प्रसिद्ध हुई जिसमें उन्होंने आठ अलग अलग किरदार निभाए थे। सुलोचना उर्फ रूबी मेयर्स को साल 1973 में सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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रमाला देवी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लक्स साबुन की ब्रांड अंबेसडर
1948 में रिलीज फिल्म ‘हम भी इंसान हैं’ में देव आनंद के साथ दिखीं रमाला देवी भी यहूदी मूल की अभिनेत्री रहीं और उनका असली नाम था रैशेल कोहेन। फिल्म ‘खजांची’ में उन पर फिल्माया गया साइकिलिंग का गाना अपने समय का बहुत ही चर्चित गाना रहा। रमाला देवी ने हिंदी सिनेमा में फैशन को खूब बढ़ावा दिया और लक्स सोप की शुरुआती ब्रांड अंबेसडर में उनका नाम शामिल रहा।
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नादिरा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नादिरा ने खरीदी रॉल्स रॉयस कार
यहूदी मूल की फिल्म अभिनेत्रियों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय नाम नादिरा का रहा है। नादिरा का असली नाम फ्लोरेंस एजकील था। एक बगदादी यहूदी परिवार में जन्मी नादिरा का हिंदी सिनेमा से परिचय मशहूर निर्देशक महबूब की पत्नी सरदार बेगम ने कराया। फिल्म ‘आन’ में अपने बोल्ड किरदार से चर्चा में आईं नादिरा को शोहरत मिली फिल्म ‘श्री  420’ में माया के किरदार से। ‘दिल अपना और प्रीत पराई’, ‘हंसते जख्म’, ‘अमर अकबर एंथनी’ और ‘पाकीजा’ जैसी फिल्मों में भी नादिरा के किरदार खूब चर्चा में रहे। फिल्म ‘जूली’ में उनके किरदार की खूब चर्चा हुई औऱ उनकी आखिरी फिल्म रही ‘जोश’ (2000)। नादिरा अपने परिजनों के इस्राइल चले जाने के बाद भी आखिरी समय तक मुंबई में ही रहीं और मुंबई में ही उनका निधन 2006 में हुआ। अपने समय की नामचीन अभिनेत्री नादिरा उन गिनती की फिल्म अभिनेत्रियों में शुमार रहीं जिनके पास रॉल्स रॉयस कार थी।

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डेविड अब्राहम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जॉन चाचा बनकर मशहूर हुए डेविड
हिंदी सिनेमा के चर्चित कलाकार डेविड भी इस्राइली मूल के अभिनेता थे। उनका पूरा नाम था, डेविड अब्राहम चेउलकर। साल 1941 में फिल्म ‘नया संसार’ से अपना फिल्मी करियर शुरू करने वाले डेविड ने करीब 110 फिल्मों में काम किया। फिल्म ‘बूट पॉलिश’ में अपने किरदार जॉन चाचा के चलते देश-दुनिया में मशहूर हुए डेविड ने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता। डेविड पर फिल्माया गया गाना ‘नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है..’ अब भी बाल दिवस पर रेडियो पर खूब बजता है। उनकी अन्य चर्चित फिल्मों में ‘अनुपमा’, ‘एक फूल दो माली’, ‘अभिमान’, ‘चुपके चुपके’ और ‘गोलमाल’ आदि शामिल हैं। साल 1969 में उन्हें भारत सरकार की तरफ से पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।

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पर्ल पदमसी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रंगमंच और सिनेमा की पदमसी
भारत और इस्राइली मूल की मां व ईसाई पिता की बेटी के रूप में जन्मी अभिनेत्री पर्ल पदमसी भी रंगमंच और हिंदी सिनेमा में अपने योगदान के रूप में खूब याद की जाती हैं। अपने चार दशक के फिल्मी करियर में पर्ल ने ‘खट्टा मीठा’, ‘जुनून’ और ‘बातों बातों में’ जैसी फिल्मों में काम किया। उनकी बेटी रायल पदमसी ने अपनी खुद की थियेटर कंपनी मुंबई में स्थापित की।
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डेविड जोसफ पेनकर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पहली बोलती फिल्म के लेखक
कैमरे के पीछे काम करने वाले यहूदी मूल के लोगों में डेविड जोसफ पेनकर का नाम मुंबई में खासा चर्चित रहा है। डेविड ने ही 1931 में रिलीज हुई देश की पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ लिखी थी। एक नाटककार, पटकथा लेखक के अलावा वह निर्देशक और गीतकार के रूप में भी सक्रिय रही। हिंदी के अलावा उन्होंने गुजराती और मराठी सिनेमा में भी खूब काम किया।
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विजू पेनकर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, बात पहलवानी की...
महाराष्ट्र स्टेट बॉडी बिल्डिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे विजू पेनकर ने भी हिंदी सिनेमा में काफी काम किया है। 1987 में रिलीज हुई फिल्म ‘टारजन एंड कोबरा’ से डेब्यू करने वाले विजू ने आगे चलकर ‘जुल्म की हुकूमत’, ‘शतरंज’, ‘वक्त हमारा है’ और ‘मोहरा’ आदि फिल्मों में भी काम किया।
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