गुलजार, जगजीत सिंह
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और, गुलजार ने उस दिन भी एक हवा का झोंका ही महसूस किया था जिस दिन दोनों पहली बार आमने सामने हुए। तो, मदन मोहन की महफिल में जगजीत ने एक दो गजलें सुनाईं। फिल्मी पार्टी थी, सब अपने में मगन। ऐसे में कौन किसी नौजवां को गाते हुए और वो भी कोई पचास साल पहले गजल गाते हुए, देखने का शौकीन रहा होगा? जगजीत ने गाना खत्म किया और जाकर गुमसुम से एक कोने में दुबक गए। बेहद जहीन शख्सियत के एक दूसरे नौजवान ने उनके कंधे पर हाथ रखा और कहा, ‘जनाब, आप तो मेहंदी हसन से भी उम्दा गाते हैं...!’