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मंदिर की सीढ़ियों से उतरते हुए की गई थी गुलशन कुमार की हत्या, हत्यारों ने कहा था- बहुत पूजा कर ली

Mon, 12 Aug 2019 05:01 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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गुलशन कुमार - फोटो : Twitter

12 अगस्त, 1997 को हिंदी म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए काला दिन था। सुबह के करीब साढे आठ बजे गुलशन कुमार पूजा करने मंदिर गए हुए थे जहां से चौंका देने वाली खबर आई। ऐसी खबर जिससे देश-विदेश के लोग हिल गए। बॉलीवुड फिल्म प्रोड्यूसर गुलशन कुमार की हत्या मुंबई में गोली मारकर दी गई थी। आज गुलशन कुमार की पुण्यतिथि है।

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गुलशन कुमार - फोटो : सोशल मीडिया

मौत से पहले गुलशन कुमार ने सुबह सात बजे प्रोड्यूसर झामु सुगंध को फोन कर कहा था कि कि एक सिंगर और फिर एक दोस्त से मिलने के बाद वो मंदिर जाएंगे और उसके बाद उनसे मिलने आएंगे। लेकिन इस कॉल के तीन घंटे बाद यानी तकरीबन साढ़े दस के करीब अंधेरी के जीतेश्वर महादेव मंदिर के सामने गुलशन कुमार को एक के बाद एक 16 गोलियां मार दी गईं। उनकी जान तुरंत चली गई। जिस देसी तमंचे से गुलशन कुमार की हत्या की गई उस पर बम्हौर लिखा था।

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gulshan kumar
क्या हुआ था उस दिन
इंडिया टुडे की एक स्टोरी के मुताबिक उस दिन 42 साल के गुलशन कुमार हाथ में पूजा की सामाग्री लिए, माला जपते हुए मंदिर की ओर जा रहे थे। मंदिर गुलशन कुमार के घर से करीब एक किलोमीटर से भी कम की दूरी पर था। हालांकि उस दिन वह अपने उत्तर प्रदेश पुलिस के गनमैन के बिना मंदिर गए थे। क्योंकि वह कुछ दिनों पहले बीमार हो गया था।

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गुलशन कुमार की हत्या जिस मंदिर के सामने की गई। उस मंदिर में सबसे अच्छे संगमरमर लगवाने और मंदिर का पुनर्निर्माण करवाने का काम उनके द्वारा ही किया गया था। गुलशन कुमार हर रोज की तरह उस दिन भी मंदिर गए। जैसे ही गुलशन कुमार पूजा करके मंदिर की सीढ़ियों से नीचे उतरे उन्हें बंदूक की रिम महसूस हुई।
 
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gulshan kumar
उन्होंने सामने खड़े शख्स से पूछा- ''ये क्या कर रहे हो। उसने जवाब दिया- बहुत पूजा कर ली। अब ऊपर जा के करना।'' जैसे ही गुलशन कुमार कुछ कह पाते। बंदूक से उन पर 16 राउंड फायरिंग कर दी गई। उनकी गर्दन और पीठ में 16 गोलियां लगी थीं। गुलशन कुमार के ड्राइवर अपने मालिक को बचाने के लिए हत्यारों पर कलश फेंकते रहे लेकिन हत्यारें नहीं रुके। देखते ही देखते उनकी जान चली गई।
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गुलशन कुमार

जानकारी के मुताबिक अबु सलेम ने गुलशन कुमार को मारने की जिम्मेदारी दाऊद मर्चेंट और विनोद जगताप नाम के शार्प शूटरों को दी थी। 9 जनवरी 2001 को विनोद जगताप ने कुबूल किया कि उसने ही गुलशन कुमार को गोली मारी। साल 2002 को विनोद जगताप को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। विनोद जगताप अभी भी जेल में ही है, लेकिन दाऊद मर्चेंट 2009 में परोल पर रिहाई के दौरान फरार हो गया और बांग्लादेश भाग गया था। 

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Gulshan Kumar

पुलिस ने इस मामले में संगीतकार नदीम को अभियुक्त बनाया था। मुंबई पुलिस ने अपनी जांच के बाद कहा था कि हत्या के लिए फिल्मी हस्तियां और माफिया के लोग जिम्मेदार थे। गुलशन कुमार की हत्या होने के वक्त नदीम लंदन में था। बाद में केस में नाम आने के बाद से वो लंदन में रहने लगा। इधर पुलिस इस हत्या में नदीम के शामिल होने के आरोप को साबित नहीं कर पाई।

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gulshan kumar

पुलिस के हिसाब से गुलशन कुमार की कैसेट कंपनी टी सीरीज की सफलता को देखकर दाऊद इब्राहिम ने एक बड़ी रकम की मांग की थी। गुलशन कुमार ने इनकार करते हुए कहा कि इतने रुपए देकर वो वैष्णो देवी में भंडारा कराएंगे। उन दिनों D कंपनी का आतंक इंडस्ट्री में बढ़ रहा था। फिल्मों की कहानी से लेकर कास्टिंग तक भाई के फोन पर बदल जाती थी। इसके बाद से ही वह अंडरवर्ल्ड के निशाने पर आ गए।

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गुलशन कुमार - फोटो : Social Media

म्यूजिक इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम बनने से पहले वो फलों के जूस बेचा करते थे। उन्होंने भक्ति के गानों का संभावित बाज़ार समझा और इसे रिकॉर्ड करना और बेचना शुरू कर किया। गुलशन कुमार को यह बात समझ आ गई थी कि देश के वृद्ध लोग आंखों की रोशनी कमजोर होने की वजह से धार्मिक किताबें पढ़ कर गा नहीं सकते। फिर किस्मत ऐसी चमकी की गुलशन कुमार भारत के सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले शख्स बन गए थे। 

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