फिल्म गाइड का दृश्य
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अद्भुत गीत, बेमिसाल संगीत
फिल्म ‘गाइड’ के सारे गाने एक से एक बेहतरीन रहे। ‘पिया तोसे नैना लागे रे’ को हिंदी सिनेमा के उन गीतों में माना जाता है जिनमें फिल्ममेकिंग का हर विभाग सौ में सौ नंबर पाता है। देव आनंद और और वहीदा रहमान को तो खैर इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला ही, फिल्म ‘गाइड’ ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जो जीता, उसमें भी फिल्म के हर विभाग का योगदान रहा। इस फिल्म के गाने पहले हसरत जयपुरी लिख रहे थे। उन्होंने एक गाने का मुखड़ा लिखा ‘दिन ढल जाए हाय रात न जाए’, इस मुखड़े पर देव आनंद ने आपत्ति कर दी तो हसरत ने फिल्म ही छोड़ दी। आनन फानन में शैलेंद्र लाए गए, उन्होंने गाने लिखने से पहले तो मना कर दिया कि वह दूसरी पसंद के गीतकार नहीं बनना चाहते। लेकिन, देव आनंद के मनाने और अपनी बनाई फिल्म ‘तीसरी कसम’ का कर्जा चुकाने को वह मान गए। पर उन्होंने हसरत की लिखी लाइन पर ही अपना पूरा गाना लिखा। एक गीतकार का दूसरे गीतकार को सम्मान देना कोई शैलेंद्र से सीखे। शैलेंद्र ने फिल्म में ‘गाता रहे मेरा दिल..’ जैसे बेहतरीन गीत उस दौर में लिखे, जब उनकी अपनी मानसिक और आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। फिल्म ‘गाइड’ के लिए उन्हें पुरस्कार नहीं मिला। वह भी ज्यादा दिन फिल्म की कामयाबी देखने को जिंदा न रह सके। शैंलेंद्र और संगीतकार एस डी बर्मन की जुगलबंदी में ‘गाइड’ अव्वल नंबर की फिल्म मानी जाती है।