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Monster Hunter Review: शिकारी का खाली गया वार, वीडियो गेम पर बनी फिल्म की ये हैं कमजोर कड़ियां

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मॉन्सटर हंटर रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review: मॉन्स्टर हंटर
कलाकार: मिला जोवोविच, टोनी जा, टिप ‘टीआई’ हैरिस, मेगन गुड और रॉन पर्लमैन आदि।
लेखक, निर्देशक: पॉल डब्ल्यू एस एंडरसन
रेटिंग: * ½


वीडियो गेम के रोमांच को बड़े परदे की फिल्म के एहसास में बदलना आसान नहीं है। ये बात इन्हें बनाने वाले भी समझते हैं। लेकिन, कभी ‘पोकेमॉन’ तो कभी ‘डोरा द एक्सप्लोरर’ जैसे किरदारों की सिल्वर स्क्रीन पर कामयाबी इन्हें बॉक्स ऑफिस के मकड़जाल में उलझाए रखती है। लेकिन, असली बात जो वीडियो गेम पर आधारित किसी फिल्म में होनी ही चाहिए, वह है वीडियो गेम के वे मूल तत्व जो किसी खिलाड़ी को शुरू से आखिर तक इस गेम से जोड़े रखते हैं। लेकिन, फिल्में बनाने वाले अक्सर यहीं भूल कर जाते हैं। नतीजा? बनती हैं ‘मॉन्स्टर हंटर’ जैसी फिल्में जिनका कोई सिर पैर नहीं होता। न इसमें कहीं वीडियो गेम के भव्य रूप जैसा कुछ दिखता है और ना ही कुछ ऐसा होता है कि गेम प्लेयर से दर्शक बना इंसान खुद को इससे जोड़ सके।
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मॉन्सटर हंटर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वीडियो गेम पर बनी फिल्मों में अगर ‘प्रिंस ऑफ परशिया’ से लेकर रेजीडेंट एविल सीरीज, ‘हिटमैन: एजेंट 47’, ‘टूम्ब रेडर’ और अब ‘मॉन्स्टर हंटर’ तक को देखें तो सबकी असल कमजोर कड़ी वीडियो गेम के असल तत्व को फिल्म बनाते समय बिसरा देना ही है। एक और बात यहां फिल्ममेकर्स को ये भी समझनी चाहिए कि कोविड महामारी ने दर्शकों के सोचने, मनोरंजन करने और परदे पर हो रही घटनाओं को समझने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। जेम्स बॉड की फिल्मों का ओपनिंग सीक्वेंस देखकर पहले भले लोगों की सांसें थम सी जाती हों लेकिन, महामारी का इतना लंबा समय सांसें थामे थामे गुजार देने के बाद उसमें कितना रोमांच बाकी रहेगा, ये जेम्स बॉन्ड की फिल्म ‘नो टाइम टू डाई’ से तय हो जाएगा। फिलहाल बात ‘मॉन्स्टर हंटर’ की जिसके हैरतअंगेज एक्शन दृश्यों का तो कोई असर बाकी नहीं रहा है।
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मॉन्सटर हंटर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘मॉन्स्टर हंटर’ की शुरुआत रेगिस्तान पर भागते एक जहाज से होती है, जिस पर एक विशालकाय आकृति का हमला होता है। दूसरी तरफ धरती पर संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षाकर्मियों का एक काफिला जा रहा है। सब हंस बोल रहे हैं। साथी टीम से मदद की पुकार सुनाई देती है और मदद के लिए पहुंचा ये काफिला खुद मुसीबत में घिर जाता है। पता चलता है कि एक और दुनिया है। इस दुनिया में विशालकाय जीव हैं। उनके पीछे शिकारी लगा है। सेना की टुकड़ी को वह आगाह भी करता है। लेकिन, दानव का हमला होता है। सब मारे जाते हैं, बस नायिका बचती है। शिकारी कहानी का नायक है। नायिका उससे मिलती है। दोनों पहले झगड़ते हैं। फिर मिलकर इन दानवीय आकृतियों का मुकाबला करने को हाथ मिलाते हैं। पर ये जीव कहानी के अध्याय बदलने के साथ साथ बदलते रहते हैं। पता ये चलता है कि उनकी तैनाती एक स्काईटावर को सुरक्षित रखने के लिए है, जिससे एक दुनिया से दूसरी दुनिया में लोग आ जा सकते हैं। सब कुशल मंगल हो जाता है पर नायिका अब धरती पर रहना नहीं चाहती। और, उधर दानवों से भिड़ने एक बड़ा बिलौटा भी आ धमका है।

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मॉन्सटर हंटर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘मॉन्स्टर हंटर’ के अंग्रेजी संस्करण का तो खैर सिरपैर उन लोगों को समझ आ भी जाएगा जिनको इसके वीडियो गेम के बारे में पता है, लेकिन सोचिए उनके बारे में जो ये फिल्म अंग्रेजी में नहीं देख रहे हैं। उनके लिए तो ये किसी सिरदर्द से कम नहीं है। कहानी क्या है ये शुरू के बीच मिनट में ही पता चल जाता है। आगे के 80 मिनट बस कंप्यूटर से बने जीवों और ग्राफिक्स की मदद से इनके आगे पीछे, ऊपर नीचे कूदते सितारे हैं। एंडरसन इस फिल्म को सिरे से पकड़ क्यों नहीं पाए, वह खुद ही इसका विश्लेषण करें तो उनके लिए आगे बेहतर होगा क्योंकि उनकी फिल्मों लोगों को लुभाती रही हैं। खासतौर से 1995 में आई ‘मॉर्टल कॉम्बैट’ और 2002 की ‘रेजिडेंट एविल’ में लोगों ने उनके काम को सराहा है।
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मॉन्सटर हंटर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘मॉन्स्टर हंटर’ बनाने का विचार इस गेम को बनाने वाली कंपनी कैपकॉम और सोनी पिक्चर्स को लगता है 2018 में रिलीज हुए वीडियो गेम मॉन्स्टर हंटर: वर्ल्ड से आया होगा। गेमिंग की दुनिया में तहलका मचाने वाले इस खेल पर फिल्म बनाने का विचार बुरा था भी नहीं, लेकिन फिल्म ये उतनी सटीक नहीं है जितना वह खेल था। एक तो वीडियो गेम पर बनी फिल्म के किरदारों के साथ खिलवाड़ होने से कहानी का सिरा शुरू से ही पटरी से उतरा दिखा। फिल्म की एक और कमजोर कड़ी है इसकी कहानी की नायिका जिसका जिक्र इसके ओरीजनल वीडियो गेम में है नहीं। और, जब गेम खेलने वालों ने उसे पहले देखा ही नहीं तो फिर भला फिल्म में वह क्यों उसके किरदार के साथ होने लगे। एंडरसन के निर्देशन की ये बड़ी खोट है जिस पर उन्हें फिल्म की पटकथा को अंतिम रूप देते समय ध्यान देना चाहिए था।
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मॉन्सटर हंटर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म के कलाकारों में सबसे ज्यादा नाइंसाफी हुई है टोनी जा के साथ। ऐसी फिल्में ही हॉलीवुड के बाहर से आने वाले कलाकारों का हॉलीवुड स्टूडियोज पर से भरोसा तोड़ती है। टोनी जा की जो शोहरत एशियाई देशों में हैं, उसके हिसाब से उनका किरदार फिल्म में गढ़ा नहीं गया है। स्क्रीन पर वह मिला के मुकाबले दिखते भी कम है। उनकी ‘ओंग बैक’ सीरीज के करोड़ों दीवाने रहे हैं, लेकिन असली एक्शन के मौके पर एंडरसन ने अपनी बीवी मिला को आगे कर टोनी के साथ नाइंसाफी की है। और, कहावत पता है ना! जैसी नीयत, वैसी बरक्कत!



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