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Rishi Kapoor: संदेशों का आखिर तक जवाब देते रहे चिंटूजी, हिंदी पत्रकारों से इस बात के लिए मांगी माफी

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Rishi Kapoor - फोटो : अमर उजाला
बीता एक साल मुंबई के फिल्म पत्रकारों पर बहुत भारी बीता है। इसलिए नहीं कि कोरोना काल में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा बल्कि इसलिए कि जितने नामचीन और गुमनाम लोगों ने इस उद्योग मे दुनिया को अलविदा कहा, शायद ही किसी दूसरे क्षेत्र में ऐसा हुआ होगा। वजह भी इसकी यही है कि सिनेमा वाले सबको गले लगाने के लिए जाने जाते हैं। यहां किसी तरह का भेद नहीं है। सितारे भी सबके अपने हो जाते हैं। कोई गुजरता है तो यूं लगता है कि कोई अपना ही चला गया। बीते साल इरफान के जाने के अगले ही दिन जब ‘चिंटूजी’ के जाने की खबर आई तो दिल धक से रह गया था। दिल से काफी करीबी रिश्ता रहा ताउम्र ‘चिंटूजी’ का। पुराने, नए सारे पत्रकार ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) को इसी नाम से बुलाते रहे।
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मेरा नाम जोकर के प्रीमियर के वक्त ऋषि कपूर - फोटो : twitter@chintskap
भोला सा राजू और उसके सवाल
अपनी टीचर को बहते पानी के किनारे कपड़े उतारते देख मतवाला हो जाने वाला फिल्म ‘मेरा नाम जोकर का बुद्धू सा लेकिन चित्ताकर्षक राजू इस फिल्म के सिर्फ तीन साल बाद ही राजा बनकर जमाने से कहता मिला, ‘मैं शायर तो नहीं, मगर ऐ हसीं, जबसे देखा मैंने तुझको, मुझको शायरी आ गई…’। इसके चेहरे पर अब तक मोहब्बत में गिरफ्तार होने का डर बाकी था। लेकिन, साल 1980 में जब इसने शालीनता उतारकर किनारे रखी और दुनिया से चिल्लाकर पूछा, ‘तुमने कभी किसी से प्यार किया?’ तो जमाने को पता चला कि आखिर प्यार करना किसे कहते हैं? रंगा और बिल्ला वाले जमाने में ऋषि कपूर ने दुनिया को मोहब्बत करना सिखाया। ये सिखाया कि कैसे बिना हीरोइन को परेशान किए आंखों ही आंखों में इजहार, इसरार और इकरार किया जा सकता है। और, ये भी सिखाया कि कैसे महिला सशक्तिकरण की बातें शुरू होने से दशकों पहले सिनेमा में महिला किरदारों को दमदार बनाने में उनके जैसा हीरो आगे आता रहा।
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Rishi Kapoor - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सबके प्यारे चिंटूजी
अपने हीरो को एक जगह खड़े खड़े, किसी स्टूल पर बैठे या फिर ड्राइविंग सीट पर स्टीयरिंग थामे थामे पूरा गाना फिल्मा देने का खतरा इससे पहले निर्देशकों ने या तो देव आनंद के साथ उठाया था या फिर राजेश खन्ना के साथ। रूमानियत का ये नया राजकुमार था, ऋषि कपूर। एक ऐसा सितारा जिसे फिल्म इंडस्ट्री में शायद ही किसी ने इस नाम से बुलाया हो, वह सबके प्यारे चिंटू या चिंटू जी ही रहे। ‘बॉबी’ में वह खड़े खड़े मोहब्बत के सबक सुना देते हैं, ‘सागर’ में स्टूल पर बैठे बैठे अपनी माशूक से सारे सवाल पूछ लेते हैं और ‘दामिनी’ में स्टीरयिंग पकड़े पकड़े मीनाक्षी शेषाद्रि से रोमांस कर डालते हैं।

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जूही चावला और ऋषि कपूर - फोटो : अमर उजाला,, मुंबई
हीरोइनों की हॉफ सेंचुरी
ऋषि कपूर को रोमांस का राजकुमार इसलिए भी कहा गया कि उन्होंने डिंपल कपाड़िया से शुरू करके नीतू सिंह, मौसमी चटर्जी, शोमा आनंद, संगीता बिजलानी, विनीता गोयल, राधिका, अश्विनी भर्वे हेमा मालिनी, श्रीदेवी, जया प्रदा और दिव्याभारती तक करीब 50 हीरोइनों के साथ परदे पर रोमांटिक गाने गाए हैं। इसमें तीन पीढ़ियों की वे अभिनेत्रियां भी शामिल हैं जो अपने अपने समय में हिंदी सिनेमा की नंबर वन हीरोइन कहलाईं। ऋषि कपूर की फिल्मों के शौकीनों के लिए एक खास बात जो हमेशा नोट करने लायक रही, वह था उनका किसी वाद्य यंत्र के साथ शूटिंग करना। ‘कर्ज’ में जब वह बार बार अतीत याद दिलाने वाली गिटार की ट्यून बजाते हैं तो उनकी अंगुलियां गिटार के तारों पर बिल्कुल किसी साजिंदे जैसी ही चलती हैं, या फिर ‘सरगम’ का वो गाना, ‘ढपली वाले ढपली बजा…’। इस गाने के शुरू होने से पहले जया प्रदा कन्हैया की प्रतिमा से एक माला निकालकर ऋषि कपूर के गले में डालती हैं। ऋषि कपूर की सिनेमा में बरसों की मेहनत को जानने, समझने और समझाने का सारा काम निर्देशक के विश्वनाथ ने बस 30 सेकंड में कर दिखाया। ‘बॉबी’ से लेकर ‘दीवाना’ तक वो हिंदी सिनेमा के कन्हैया ही बने रहे।
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ऋषि कपूर - फोटो : Instagram
‘अग्निपथ’ का रऊफलाला
और, जब कंस बनने की चुनौती सामने आई तो ऋषि कपूर ने वो भी करके दिखाया। अपने पिता यश जौहर की अमिताभ बच्चन के साथ बनाई फिल्म ‘अग्निपथ’ का करण जौहर ने जब रीमेक किया तो उसमें एक नए किरदार का प्रवेश हुआ, रऊफ लाला। आंखों में सुरमा, पठानी सूट और हाथ में लंबा रूमाल, कोई सोच भी नहीं सकता था कि शाहरुख खान जैसे सितारों को बाहें फैलाकर और शरीर को एक तरफ झुकाकर संवाद बोलने वाली अदाएं सिखाने वाला कलाकार ऋषि कपूर, लोगों के मन में अपने लिए नफरत भी जगा सकता है। क्योंकि, ऋषि कपूर को तो लोगों ने ‘एक चादर मैली सी’ में भी प्यार किया और ‘जहरीला इंसान’ में भी।
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पद्मिनी कोल्हापुरे, ऋषि कपूर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
भंवरे का काम फूल खिलाना
लेकिन, हिंदी सिनेमा का ये वो भंवरा रहा जिसने पूरा जीवन सिर्फ फूल खिलाने पर फोकस किया, फूल को राजकंवर ले जाए या कोई और, उसने न परवाह की और न ही कभी इस बात का गम किया। तब भी जब कॉमेडी के तमाम दृश्यों में बराबर की साझेदारी के बावजूद तालियां अमिताभ बच्चन को मिलीं और तब भी जब 102 साल के पिता के जिद्दी बेटे के रूप में शानदार काम करने के बावजूद पुरस्कारों की लिस्ट में उनका नाम तक न दिखा। ऋषि कपूर ने अपने सुपरस्टारडम के दिनों में भी कभी मल्टीस्टारर फिल्मों से परहेज नहीं किया। करियर के दूसरे साल में ही वह राकेश रोशन के साथ ‘खेल खेल में’ कर रहे थे। इसी फिल्म में ऋषि कपूर से हुई दोस्ती नीतू सिंह को एक दिन नीतू कपूर बनाकर कपूर खानदान में ले आई। ऋषि कपूर की तमाम मल्टीस्टारर फिल्मों में से अमिताभ बच्चन के साथ बनी सारी फिल्में सुपरहिट रहीं। फिल्म ‘कभी कभी’ से शुरू हुआ ये साथ ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘नसीब’ और ‘कुली’ जैसी फिल्मों में इतना गाढ़ा हुआ कि अमिताभ को ही बीते साल की 30 अप्रैल की सुबह अपने ट्विटर पर ये लिखना पड़ा, ही इज गॉन!
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दामिनी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
लिप सिंक गानों का असली कमाल
हिंदी सिनेमा के जिस दौर में ऋषि कपूर ने तमाम मेनकाओं को संन्यासिन बना दिया, उस दौर में अभिनेता गानों पर होंठ चलाने में आनंद भी उठाते थे और उन्हें इसमें मज़ा भी आता था। ट्रेन की छत पर चढ़कर गाने की शुरुआत करना हो या फिर कव्वाली में महफिल लूट लेना, अकबर इलाहाबादी के किरदार में रच जाने वाले ऋषि कपूर ने हर बार कहा, हम किसी से कम नहीं। 30 अप्रैल 2020 की सुबह पौने नौ बजे हमेशा के लिए आंखे मूंद लेने वाले मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर आखिरी सांस तक जिंदगी से मोहब्बत करते रहे। अस्पताल के बिस्तर पर पड़े पड़े जब उनकी सांसें उखड़ रही थीं तो भी वह उनका किसी न किसी तरह मनोरंजन ही करने की कोशिश करते दिखे। गौरतलब ये भी है कि 30 अप्रैल 1993 को ही ऋषि कपूर के अभिनय की दूसरी पारी की फिल्म दामिनी भी रिलीज हुई थी।

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ऋषि कपूर - फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी पत्रकार बिरादरी से मांगी माफी
ऋषि कपूर से बातों का सिलसिला मेरा कभी टूटा ही नहीं, लेकिन दो साल पहले उनके बेटे की फिल्म संजू की रिलीज के दौरान इस सिलसिले में थोड़ा इमोशनल एंगल भी जुड़ा। हुआ यूं कि फिल्म ‘संजू’ की रिलीज के दौरान फिल्म का प्रचार संभाल रहे लोगों और मीडिया के लोगों के बीच रिश्ते सहज नहीं हो पा रहे थे। रणबीर कपूर पर बहुत दबाव था कि वह देश के हर अखबार, हर चैनल और हर पोर्टल से बात करें और रणबीर कपूर ठहरे अंतरंगी इंसान। तमाम लोग उनका इंटरव्यू नहीं कर पाए। लोगों ने कहा कि ये बात ऋषि कपूर तक पहुंचनी चाहिए। मैंने इसकी जानकारी जब उन्हें दी तो ऋषि कपूर ने जो किया, वह एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि मैं एक संदेश टाइप करके भेजता हूं, इसे उन सभी हिंदी पत्रकारों को पढ़वा दीजिए जो रणबीर कपूर का इंटरव्यू संजू फिल्म की रिलीज के दौरान नहीं कर पाए। इस संदेश में ऋषि कपूर लिखते हैं, “ये बात साझा करने के लिए धन्यवाद, सर। मैं इस बारे में पूरी तरह से अंधेरे में हूं। न तो मेरी कोई अथॉरिटी है और न ही मेरा इस बात पर कोई नियंत्रण है कि पीआर टीम क्या करती है। मैं और रणबीर इसकी जानकारी न होने के लिए माफी मांगते है और उम्मीद करते हैं कि हमारी इस क्षमा याचना से आपको संतोष होगा। धन्यवाद!” जिसने भी ये संदेश पढ़ा वो ऋषि कपूर की इस सदाशयता का कायल हो गया।
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अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर - फोटो : सोशल मीडिया
अमिताभ बच्चन ने लिखा, ‘ही इज गॉन!’
ऋषि कपूर की हालत बीते साल जनवरी से ज्यादा बिगड़नी शुरू हुई। लोगों ने उनकी सेहत पर कयास लगाने शुरू किए और तब भी उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबरें आई थीं। इस बारे में मैंने उन्हें संदेश कर सेहत की जानकारी लेनी चाही तो उनका कहना था, “बहुत शुक्रिया, लेकिन मुझे क्यों अस्पताल भेजने लगे लोग? ख्याल रखने के लिए फिर से धन्यवाद। सादर...।” फरवरी महीने में भी वह दिल्ली में थे जब पहली बार उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। ऋषि कपूर ने कहा कि कुछ खास नहीं है। दिल्ली के प्रदूषण की वजह से ऐसा हुआ होगा। उन्होंने अपना चेकअप कराया और मुंबई चले गए। पिछले साल लॉकडाउन शुरू होने तक भी सब कुछ ठीक ही था। उनके इकलौते बेटे रणबीर अपनी दोस्त आलिया भट्ट के साथ रहने चले गए थे। जनम जनम का साथ निभाने का वादा करने वाली नीतू कपूर ही उन्हें अस्पताल लेकर गईं। और 30 अप्रैल की सुबह उनके चले जाने की खबर दुनिया को सुनाने की बारी आई तो कपूर खानदान ने मदद ली उस शख्स की जिसकी फिल्म ज़ंजीर की शूटिंग के दौरान आवाज सुनकर ऋषि कपूर के पिता राज कपूर ने एलान कर दिया था कि ये एक्टर एक दिन बहुत बड़ा स्टार बनेगा, यानी अमिताभ बच्चन।
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