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Dia Mirza: फिर दिखा दीया मिर्जा का बड़बोला रूप, भारतीय सिनेमा को बताया 150 साल का, अपनी फिल्मों को लेकर...

Thu, 25 Jan 2024 09:53 PM IST
दीक्षा पाठक अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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दीया मिर्जा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभिनेत्री दीया मिर्जा का कहना है कि भारतीय सिनेमा में महिलाओं को एक निश्चित उम्र के बाद मुख्य भूमिकाओं वाले किरदार नहीं दिए जाते हैं। वह कहती हैं कि अब समय बदल गया है और उनकी हालिया रिलीज फिल्म ‘धक धक’ इस बात की गवाह है। मुंबई में हर साल अपने जानने वालों की भीड़ जुटाकर रेवड़ियों की तरह बंटने वाले दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म अवार्ड्स की इस साल की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दीया ने खूब फिल्मी ज्ञान बांटा और चमक खो चुके अपने फिल्मी करियर के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराया।
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दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म अवार्ड 2024 प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीया मिर्जा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म अवार्ड 2024 की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अभिनेत्री दीया मिर्जा कितनी तैयारी करके आई थीं, इसकी पोल सिर्फ इस बात से खुल गई कि उन्होंने भारतीय सिनेमा को 150 साल पुराना बता दिया। दादा साहब फाल्के को भारतीय सिनेमा का जनक माना जाता है। उन्होंने भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' साल 1913 में रिलीज की थी।
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दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म अवार्ड 2024 प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीया मिर्जा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अभिनेत्री दीया मिर्जा ने कहा, 'पिछले साल मेरी फिल्म 'धक धक रिलीज हुई थी। ऐसी कहानी को लिखने में हमारे देश को ‘150 सालट लग गए। मुझे खुद ही ऐसी फिल्म में काम करने के लिए 23 साल तक इंतजार करना पड़ा। इस फिल्म में चार औरतों की कहानी है जो अलग अलग उम्र की थी और एक साथ रोड ट्रिप पर निकलती हैं। वह चार औरतें जिस मुकाम पर पहुंचती हैं, उम्मीद है कि हमारे देश की औरतें भी उस मुकाम पर पहुंचेगी।' 

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दीया मिर्जा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अभिनेत्री दीया मिर्जा ने दावा किया कि फिल्मों में उनकी 23 साल की अभिनय यात्रा के दौरान महिलाओं को लेकर इस तरह के किरदार नहीं लिखे गए। उन्होंने कहा, ‘हमारी फिल्में हमारी सभ्यता और समाज का आईना हैं। लेकिन इसके साथ-साथ जो हमारे समाज की खामियां हैं, उसको ठीक करने के लिए अच्छी कहानियों की बहुत जरूरत है। उसे भी हमारी फिल्मों में दिखाना बहुत जरूरी है। हमें इस सच्चाई को समझना चाहिए कि आज भी फिल्मों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है, चाहे वो निर्देशन हो, प्रोडक्शन हो या लेखन हो।' 

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दीया मिर्जा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

ओटीटी पर आए बदलाव को लेकर दीया मिर्जा ने कहा, 'ओटीटी ने स्टार सिस्टम की परंपरा को तोडा है। सबको काम करने के अच्छे मौके मिल रहे हैं और  अपनी कला को  दिखा रहे हैं चाहे वह फिल्म की किसी भी विधा से जुड़े हो। जब मैं घर पर बैठी थी और मुझे काम नहीं मिल रहा था> मेरी तरह कई अभिनेत्रियां  कुछ अच्छा काम करने के लिए रुकी थी, उनको भी अच्छे मौके मिले। शेफाली शाह, हुमा कुरैशी, जैसी कई अभिनेत्रियां ओटीटी पर बहुत अच्छा काम कर रही हैं।'  

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