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बाइस्कोप: इसलिए आज भी कायम है ‘धूम’ सीरीज का तिलिस्म, फैंस गाते हैं, ‘धूम मचा ले, धूम मचा ले, धूम!’

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धूम 3 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदी की सबसे कामयाब फ्रेंचाइजी ‘धूम’ सीरीज की तीसरी फिल्म को रिलीज हुए रविवार को सात साल पूरे हो गए। 16 साल से दर्शकों के दिलो दिमाग पर छाई इस सीरीज की चौथी फिल्म का एलान यशराज फिल्म्स नए साल में करने की तैयारी में है। उससे पहले आइए कोशिश करते हैं इस फ्रेंचाइजी के लेखक विजय कृष्ण आचार्य और इसके संगीतकार प्रीतम से इन फिल्मों का तिलिस्म समझने की।
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धूम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदी सिनेमा में एक ही कहानी के कई संस्करण बनाने का प्रचलन जिस फिल्म से पहली बार दमदार तरीके से आगे बढ़ा, वह रही यशराज फिल्म्स की फ्रेंचाइजी ‘धूम’। दो जांबाज पुलिसवाले और एक खतरनाक अपराधी। फिल्म दर फिल्म ये विलेन बदलते रहे। पहले जॉन अब्राहम आए। फिर ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय। तीसरी बार इस फ्रेंचाइजी में विलेन बने आमिर खान और अब नंबर रणवीर सिंह का लग सकता है। धूम सीरीज का ये तिलिस्म अनूठा है, इसे जितना सुलझाने की कोशिश करो, ये उतना ही उलझता जाता है।
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धूम 3 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
चलिए, फ्रेंचाइजी के करिश्मे को शुरू से पकड़ने की कोशिश करते हैं। इन तीनों फिल्म की एक कॉमन कड़ी रहे हैं पहली धूम और धूम 2 के लेखक व धूम 3 के निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य उर्फ विक्टर। इस सीरीज की सभी फिल्मों ने पर्दे पर हैरतअंगेज और नयनाभिराम दृश्यों की लड़ियां सजाईं। सीरीज की पिछली फिल्म यानी धूम 3 को रिलीज हुए सात साल पूरे हो रहे हैं और लोग अब भी इसकी चौथी कड़ी का इंतजार कर रहे हैं।

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विजय कृष्ण आचार्य - फोटो : instagram/vijaykrishnaacharyaofficial
आखिर क्या है इस फ्रेंचाइजी के तिलिस्म का राज? विक्टर समझाने की कोशिश करते हैं, “एक दर्शक के नाते और एक बड़े होते बच्चे के तौर पर मुझे चोरी-डकैती वाली फिल्म बहुत भाती थी। मुझे लगता है कि चोरी-डकैती वाली हर फिल्म में कोई न कोई सत्ता विरोधी बात अंतर्निहित होती है और धूम सीरीज भी इसी के हक में खड़ी होती है। अगर आप किसी भी ऐसी फिल्म पर नजर डालें जिसके किरदार नैतिक तौर पर स्याह चरित्र रखते हों तो वे किसी न किसी रूप में समाज के खिलाफ बगावत करते दिखेंगे। बागी जनता को हमेशा पसंद आते रहे हैं।”
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फिल्म- धूम - फोटो : अमर उजाल आर्काइव, मुंबई
हिंदी सिनेमा में ‘धूम’ सीरीज को ट्रेंड सेटर इसलिए भी माना जाता है क्योंकि इसका लेखन सामान्य अपराध फिल्मों से पूरी तरह इतर रहा। विक्टर कहते हैं, “एक लेखक के तौर पर लोग बस ऐसा कुछ लिखना चाहते हैं जिसमें दर्शकों को आनंद आए और उसे लोकप्रियता मिले। लेकिन, मेरा मानना ये है कि लेखक की भूमिका या उसका काम लोकप्रियता की तलाश करना नहीं होता। हमारी भूमिका वह काम करने की होती है जिसे हम करना चाहते हैं या करना पसंद करते हैं। दर्शकों की बदलती रुचि को देखते हुए कहानी का कोई अंत भी रचना पड़ता है, लेकिन ऐसी कहानियां सारे दर्शकों को खुश कर देंगी, ये जरूरी नहीं है।” 
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आमिर खान - फोटो : धूम 3
विक्टर ये समझाने की कोशिश भी करते हैं कि ‘धूम’ सीरीज की अब तक आ चुकी तीनों फिल्मों मे अपना एक अलग दर्शक वर्ग तैयार किया है। धूम के किरदारों का अपना एक यूनीवर्स है। वैसे तो यशराज फिल्म इन दिनों अपने जासूसों का एक अलग यूनीवर्स तैयार कर रहा है जिसमें पठान, टाइगर, कबीर सब एक साथ दिखेंगे और आपस में एक दूसरे से संपर्क साधते भी नजर आ सकते हैं। लेकिन सिनेमा बनाने का विक्टर का अपना अलग पैमाना है। वह कहते हैं, “आपका लेखन मजेदार होना चाहिए। मैंने जो कुछ भी लिखा, वह चाहे हिट हुआ हो या पिट गया हो, मजेदार सफर रहा है। वजह यही है कि आपको कुछ नया या अलग लिखने की कोशिश करनी होगी। ‘धूम’ के तिलिस्म के पीछे की यही असली कहानी है। सच पूछें तो पहली ‘धूम’ से पहले ऐसा ड्रामा पर्दे पर तो कोई लेकर नहीं आना चाहता था।’
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प्रीतम - फोटो : instagram/ipritamofficial
‘धूम 3’ की सातवीं सालगिरह मना रहे इसके प्रशसंकों से बात करें तो वे ये मानते हैं कि इस फ्रेंचाइजी की फिल्मों में कहानियों के साथ साथ इसके संगीत का भी बहुत योगदान रहा है। खासतौर से इसका टाइटल म्यूजिक तो अब भी लोगों के जेहन में छाया रहता है। ‘धूम’ सीरीज से शुरू से जुड़े रहे संगीतकार प्रीतम बताते हैं कि इस सीरीज का संगीत बनाने के लिए वह हमेशा चुनौतियों से जूझते रहे हैं। वह कहते हैं, “इस सीरीज की आखिरी दोनों फिल्मों ‘धूम 3’ और ‘धूम 2’ की रिलीज में काफी लंबा समय बीत चुका था। इसलिए धूम 3 के लिए काम करते वक्त धूम 2 का कोई दबाव या उसकी कोई भी छाप बाकी नहीं थी। लेकिन, मुझे लगता है कि तमाम धूम फिल्मों की तुलना में ‘धूम 3’ के लिए मैंने सबसे ज्यादा मेहनत की। वजह यह थी कि इसकी सिचुएशन थोड़ी कॉम्पलिकेटेड थी। फिल्म में एक ऐसा सर्कस चल रहा था जिसने चीजों को जटिल बना दिया।”
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धूम 3 - फोटो : फिल्म
तो क्या आमिर खान की किसी फिल्म का संगीत करने का दबाव प्रीतम पर बिल्कुल नहीं था। प्रीतम खुलासा करते हैं, “आप सही कह रहे हैं कि ‘धूम 3’ की मुख्य चुनौती यही थी कि मैं पहली बार आमिर खान के साथ काम कर रहा था। इस फिल्म का संगीत बनाने में लंबा वक्त लगा। लेकिन, इस दौरान हमने बहुत मजे किए। ‘धूम 3’ की चुनौतीपूर्ण यह थी कि इसमें सिचुएशन पर फिट बैठने वाला संगीत बनाना आसान नहीं था। यह हर हिसाब से बहुत बड़े पैमाने की फिल्म थी और विक्टर जिस तरीके से उन सिचुएशन को शूट करना चाहते थे, उसका स्केल बहुत बड़ा था।”
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