चलते-चलते मेरे गीत याद रखना
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपकी बप्पी दा से जुड़ी हुई और भी यादें होंगी, कुछ हमारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे आप?
बप्पी के साथ मैंने बहुत गाने लिखे और कई बहुत लोकप्रिय हुए हैं। रामसे ब्रदर्स की कम से कम 10 पिक्चरों में बप्पी का म्यूजिक था और मैंने गीत लिखे हैं। देव साहब के साथ भी ‘अव्वल नंबर’ बप्पी ने की, उसके गीत मैंने लिखे। निर्माता भीष्म कोहली की फिल्म थी ‘चलते चलते’, उसके बाद ‘दिल से मिले दिल’। उमेश मेहरा की फिल्म में उनके साथ मैंने गीत लिखे ‘अविनाश’ फिल्म में। केतन आनंद की दो फिल्में थीं ‘शर्त’ और ‘एक्शन’, उसमें मैंने गीत लिखे, बप्पी का संगीत था। बासु दा की एक फिल्म में मैंने गीत लिखे, उसमें बप्पी का संगीत था। हम लोगों ने साथ में काफी काम किया।
ये वो दौर था हिंदी सिनेमा का जब गानों के मायने होते थे। गाने याद रह जाते थे सिनेमा देखने के बाद। सिनेमा को लोग उनके गानों से याद रखते थे। आज की तारीख में मैं ‘चलते चलते मेरे गीत याद रखना’ की बात कर रहा हूं..
देखिए क्या है, संगीत और खासतौर पर जो फिल्मों का संगीत है, वह तो एक दर्पण है। जैसी फिल्म बनती है, जैसी निर्माता निर्देशक सोचते हैं, वैसा ही या उसमें बंध के संगीतकार उनकी रचना करता है और ये लेखक फिर उस पर बोल बिठाता है। अब इसमें कविता जो एक आदमी लिखता है, वह तो बिल्कुल खुली आजाद कविता होती है।