भारत इस वर्ष आजादी के 71 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भारत में कई मायनों में बड़े बदलाव देखे गए। इस बदलाव में सिनेमा में काफी साथ दिया। भारतीय सिनेमा ने अपनी फिल्मों के सहारे ना केवल भारतवासियों से दिलों में देशभक्ति को जगाकर रखा है बल्कि समय-समय पर फिल्मों में देश की स्थिति को भी बयां किया है। देशभक्ति पर कई फिल्ममेकर्स और सवांद लेखकों ने तो फिल्मों के लिए ऐसी भी डायलॉग लिखे हैं जिसे सुनने के बाद हर किसी के अंदर देशभक्ति जाग उठती है। आजादी की 71वीं सालगिरह पर आज हम आपको ऐसे ही कुछ खास डायलॉग्स से रूबरू करवाते हैं।
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डायलॉग- हमारा हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है, और जिंदाबाद रहेगा!
फिल्म- गदर: एक प्रेम कथा (2001)
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डायलॉग- एक सच्चे देशभक्त को हम फौज से निकाल सकते हैं, लेकिन उसके दिल से देशभक्ति नहीं
फिल्म- जय हो (2014)
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डायलॉग- तुम दूध मांगोगे हम खीर देंगे तुम कश्मीर मांगोगे हम चीर देंगे
फिल्म- मां तुझे सलाम (2002)
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डायलॉग- ये मुस्लमान का खून ये हिंदू का खून, बता इस में मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा
फिल्म- क्रांतिवीर (1994)
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डायलॉग- तुम लोग परिवार के साथ यहां चैन से जियो, इसलिए हम लोग रोज बॉर्डर पर मरते हैं
फिल्म- हॉलीडे (2014)
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डायलॉग- हम तो किसी दूसरे की धरती पर नजर भी नहीं डालते, लेकिन इतने भी नालायक बच्चे भी नहीं हैं कि कोई हमारी धरती मां पर नजर डाले और हम चुप-चाप देखते रहें।
फिल्म- बॉर्डर (1997)
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डायलॉग- मुझे स्टेट्स के नाम न सुनाएं देते हैं न दिखाई देते हैं, सिर्फ एक मुल्क का नाम सुनाई देता है वह है I-N-D-I-A
फिल्म- चक दे इंडिया (2007)
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डायलॉग- रिलीजियस वाला जो कॉलम होता है, उसमें हम बोल्ड और कैपिटल में इंडियन लिखते हैं।
फिल्म- बेबी (2015)
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डायलॉग-हिंदुस्तान जैसा भी देश हो, उसे दो चीज बिल्कुल पसंद नहीं है, एक क्रिकेट में हार, दूसरा अपने देश में वार
फिल्म-कंटे (2002)