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जन्मदिन: पब्लिक प्लेस पर देव आनंद के काला कोट पहनने पर था बैन, शूटिंग के दौरान लंच ब्रेक में की थी शादी

Sat, 25 Sep 2021 08:28 PM IST
हर्षिता सक्सेना एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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देव आनंद - फोटो : सोशल मीडिया

60 के दशक में फिल्म इंडस्ट्री में रोमांस, स्टाइल और दिल को छूने वाले किरदार निभाने वाले देव आनंद का हर साल 26 सितंबर को जन्मदिन मनाया जाता है। आज भी देव आनंद के लाखों दीवाने हैं। 26 सितंबर 1923 को पंजाब के शंकरगढ़ में जन्मे देव आनंद का असली नाम धर्मदेव पिशोरिमल आनंद था, लेकिन उन्हें बॉलीवुड में सिर्फ देव आनंद के नाम से जाना गया। देव साहब के घर वाले उन्हें चीरू कहकर बुलाते थे ।

देव आनंद अपने जमाने के सबसे हैंडसम हीरो थे। उनकी खूबसूरती का जादू कुछ ऐसा था कि उस दौर में लोगों में एक अफवाह फैल गई थी। एक दौर वह भी आया जब उनके पब्लिक प्लेस में काला कोट पहनने पर बैन लगा दिया गया। ऐसी अफवाह थी कि देव आनंद को काले कपड़ों में देखने के लिए लड़कियां अपनी छतों से कूद जाया करती थीं।

 

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देव आनंद - फोटो : सोशल मीडिया

देव आनंद ने अपने करियर की शुरुआत 85 रुपये के वेतन पर एक कंपनी में अंकाउटेंट की नौकरी के साथ की थी। बतौर हीरो देव आनंद साहब ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1946 में आई फिल्म 'हम एक हैं' से की थी। एक सांस में लंबी डायलॉग डिलीवरी और एक तरफ झुक कर चलने का उनका खास अंदाज लोगों को बहुत पसंद आता था । 1949 में पहली बार देव साहब ने नवकेतन फिल्म्स के नाम से अपनी प्रोडक्शन कंपनी की शुरुआत की। बॉलीवुड में गुरु दत्त को पहली बार ब्रेक देने का श्रेय भी देव साहब को ही दिया जाता है।

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देव आनंद - फोटो : सोशल मीडिया

आरके नारायण के उपन्यास पर बनी फिल्म गाइड आज भी दर्शकों को पसंद है। इस फिल्म के जरिए पहली बार लिव इन रिलेशनशिप को पर्दे पर दिखाया गया था। यह देव आनंद की पहली रंगीन फिल्म थी, जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला। बॉलीवुड का कोहिनूर कहे जाने वाले देव साहब को एक्टिंग और डायरेक्शन में महारत हासिल थी। हिंदी सिनेमा में नई-नई एक्ट्रेस लांच करने का चलन भी देव साहब से ही शुरू हुआ था।

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देव आनंद - फोटो : सोशल मीडिया

देव आनंद का पहला प्यार सुरों की रानी सुरैया थीं । फिल्म विद्या की शूटिंग के दौरान जब वह पानी में डूब रही थीं तो देव साहब ने अपनी जान पर खेल कर उन्हें बचाया था। यहीं से शुरू हुई इन दोनों की प्रेम कहानी। फिल्म जीत के सेट पर देव साहब ने सुरैया को 3000 रुपये की हीरे की अंगूठी के साथ प्रपोज भी किया। लेकिन सुरैया की नानी की वजह से ये रिश्ता कभी जुड़ नहीं सका। उन्हें यह रिश्ता इसलिए मंजूर नहीं था क्योंकि देव आनंद हिंदू थे और सुरैया मुस्लिम।

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देव आनंद - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म टैक्सी ड्राइवर की शूटिंग के दौरान देव आनंद का दिल अपनी नई हीरोइन कल्पना कार्तिक पर आ गया। फिल्म की शूटिंग के दौरान ही एक दिन दोनों ने लंच ब्रेक में शादी कर ली। कल्पना आखिरी दम तक देव आनंद की पत्नी रहीं। सदाबहार सुपरस्टार देव आनंद आज भले ही दुनिया में न हों, लेकिन अपनी बेहतरीन फिल्मों, अलग अंदाज और शानदार एक्टिंग के जरिए वो हमेशा लोगों के बीच जिंदा रहेंगे।
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देव आनंद - फोटो : सोशल मीडिया

1946 से 2011 तक देव आनंद ने सिनेमा की दुनिया में सक्रिय रहते हुए लगभग 19 फिल्मों का निर्देशन किया और अपनी 13 फिल्मों की कहानी खुद लिखी। बतौर अभिनेता देव आनंद की सबसे अधिक चर्चित फिल्में थीं ‘गाइड’, ‘जिद्दी’, ‘काला पानी’, ‘हरे कृष्णा हरे रामा’, ‘मुनीम जी। देव साहब ने अपने करियर में 116 फिल्मों में काम किया। 3 दिसंबर 2011 को उन्होंने लंदन में अंतिम सांस ली।

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