कोरा कागज का दृश्य
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कहानी मुलाकातों, बातों और झंझावातों की
जैसा कि थोड़ी देर पहले आपने पढ़ा कि फिल्म ‘कोरा कागज’ एक बांग्ला फिल्म का रीमेक है। आपको शायद ये जानकर हैरानी हो कि हिंदी सिनेमा की तमाम कालजयी फिल्में जैसे ‘परिणीता’, ‘मझली दीदी’, ‘हम हिंदुस्तानी’, ‘साहब बीबी और गुलाम’, ‘काबुलीवाला’, ‘दो दूनी चार’, ‘अंगूर’, ‘बावर्ची’, ‘अमर प्रेम’ और ‘चुपके चुपके’ आदि भी बांग्ला फिल्मों की ही रीमेक हैं। ‘कोरा कागज’ की कहानी के पन्ने सुकेश और अर्चना की मुलाकातों, बातों और उनके जीवन में आए झंझावातों से भरे गए हैं। दोनों की यूं ही अचानक मुलाकात होती है। अर्चना के पिता को सुकेश अच्छा लगता है। अर्चना को भी वह भा जाता है। दोनों की शादी होती है। लेकिन, अर्चना की मां को चैन नहीं। कलह दोनों को अलग कर देती है। अर्चना वापस अपने माता पिता के पास रहने आ जाती है। घरवाले उसकी फिर से शादी करने के पक्ष में है। लेकिन, अर्चना चाहकर भी सुकेश को भूल नहीं पाती। उसे अब जीवन समझ आने लगता है। दोनों फिर अचानक एक दिन मिलते हैं और इस बार कागज कोरा नहीं रह पाता।