फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jaane Bhi Do Yaaro: सुधीर-विनोद की कहानी के पूरे हुए 40 साल, कुंदन शाह ने मुफलिसी में बनाई क्लासिक फिल्म

विज्ञापन
1 of 8
‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हिंदी सिनेमा के दर्शकों को लेकर अगर आपको ये लगता है कि वे अक्सर कालजयी फिल्मों को पहचानने में भूल कर जाते हैं तो ये कोई आज का मसला नहीं बल्कि तब से चला आ रहा है जब से फिल्में बनती आ रही हैं। ‘मेरा नाम जोकर’ से लेकर ‘सदमा’ और ‘रहना है तेरे दिल’ में तक ऐसी फिल्मों की बहुत लंबी सूची है। लेकिन अगर बात आज से ठीक 40 साल पहले की करें तो 12 अगस्त 1983 को रिलीज हुई एक फिल्म के साथ भी ये हादसा हो चुका है। साल 1983 में वैसे तो फिल्म ‘हिम्मतवाला’ में श्रीदेवी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोला। इसी साल सनी देओल की भी सिनेमा में बोहनी हुई और इसी साल अमिताभ बच्चन ने फिल्म ‘कुली’ भी रिलीज हुई। साल 1983 की हिट फिल्मों की अगल तलाश करेंगे तो आपको ‘हीरो’, ‘अंधा कानून’, ‘मवाली’, ‘अवतार’, ‘सौतन’ और ‘अगर तुम ना होते’ जैसी फिल्में भी मिल जाएंगी। लेकिन, नहीं मिलेगी तो सिर्फ वो फिल्म जिसकी रिलीज के आज 40 साल पूरे हो रहे हैं। जी हां, फिल्म ‘जाने भी दो यारो’!
विज्ञापन

2 of 8
‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कहानी दो प्रेस फोटोग्राफरों की
फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ की कहानी थी भी उन लाखों, करोड़ों लोगों की जो कुछ बन पाने की जुगत में दिन रात लगे रहते हैं। ये कहानी है एक अखबार के लिए काम करने वाले दो भोले भाले लेकिन ईमानदार फोटोग्राफरों की जिनके कैमरे में एक कत्ल कैद हो जाता है। असली कातिल को पकड़ने के चक्कर में दोनों खुद बिल्डरों के काले धंधे के दलदल में आ गिरते हैं और जितना इससे निकलने की कोशिश करते हैं, उतना ही और अंदर धसते जाते हैं। कुंदन शाह ने इन दोनो को आम आदमी का नुमाइंदा बनाकर सिस्टम मे करप्शन के कपड़े बीच चौराहे उतारने की तब कोशिश की। फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ की चुस्त कथा पटकथा कुंदन शाह ने सुधीर मिश्रा के साथ मिलकर लिखी और इसके जबर्दस्त संवाद लिखने का काम किया बाद में कैलेंडर बनकर मशहूर हुए अभिनेता निर्देशक सतीश कौशिक ने अपने जोड़ीदार रंजीत कपूर के साथ।

Kumar Sanu: कुमार सानू ने संदीप खुराना के साथ मिलकर गाया 'वंदे मातरम' गीत, स्वतंत्रता दिवस पर होगा रिलीज
विज्ञापन

3 of 8
‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
11 साल पहले फिर से हुई थी रिलीज
साल 2012 में ‘जाने भी दो यारो’ की फिर से रिलीज होने के वक्त कुंदन शाह के चेहरे पर बच्चों जैसी खुशी दिखाई दे रही थी। ये खुशी इस बात की थी कि मीडिया की जो चमक दमक कुंदन को साल 1983 में नसीब नहीं हुई थी, वह सब उनके सामने था। फिल्म की पहली रिलीज तो कब हुई और कब पिक्चर सिनेमाघरों से उतर गई, आधे हिंदुस्तान को तो पता भी नहीं चला और ये इसके बावजूद कि फिल्म को बनाया था राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम यानी एनएफडीसी ने। सरकारी दफ्तर में काम सरकारी तरीके से ही होता हैं। हालांकि, कुंदन शाह ने इस बात पर कभी गिला नहीं किया कि उनकी फिल्म को अच्छे प्रचार प्रसार के साथ रिलीज नहीं किया गया।

Bollywood Celebs: कभी दिवालिया हो गए थे ये सितारे, मेहनत के बल पर फिर जुटाई करोड़ों की दौलत

4 of 8
‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
निर्देशक बनना किसी दिक्कत से कम नहीं
कुंदन शाह का हमेशा यही मानना रहा कि फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ अपनी पहली रिलीज में भी अपने बजट के हिसाब से अच्छा कारोबार करने में सफल रही थी। फिल्म में कोई गाना नहीं था, कोई आइटम नंबर नहीं था, हीरोइन जो थी फिल्म की वह वैम्प टाइप की थी और इसके बावजूद लोगों को ये कहानी अपनी जैसी लगी। खुद कुंदन शाह ने तब बातचीत में कहा था, ‘साल 1983 में ‘जाने भी दो यारो’  जैसी फिल्म बनाना और रिलीज करना आसान नहीं था। फिल्म के निर्देशन में मुझे बहुत दिक्कतें आईं लेकिन अब देखो तो लगता है कि किसी फिल्म का निर्देशक बन पाना ही अपने आप में किसी दिक्कत से कम नहीं है।’

OMG 2: 'ओएमजी 2' को लेकर राष्ट्रीय हिंदू परिषद भारत की घोषणा, अक्षय कुमार को थप्पड़ मारने पर देंगे 10 लाख
विज्ञापन

5 of 8
‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
चापलूसी नहीं करेगा असली निर्देशक
कुंदन ने तब कहा था, ‘असली निर्देशक कभी सितारों की चापलूसी नहीं करेगा। चापलूस निर्देशक कभी अच्छा सिनेमा नहीं बना सकता और चापलूसी पसंद करने वाला सितारा कभी जमाने का नायक नहीं बन सकता।’ फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ की दूसरी रिलीज पर बातें करते हुए कुंदन शाह का इशारा किसकी तरफ था, उन्होंने बताया नहीं। ‘जाने भी दो यारो’ में जिस एक शख्स को सबसे ज्यादा पैसा मिला था वह थे नसीरूद्दीन शाह और साल 1983 में उनकी इस फिल्म के लिए फीस थी कुल 15 हजार रुपये। और, वह भी इस शर्त के साथ फिल्म की शूटिंग के लिए कपड़े वह घर से पहनकर आएंगे और अपना निकोन कैमरा भी साथ लेकर आएंगे, जिसे गले में लटकाकर उन्हें फिल्म में फोटोग्राफर दिखना था।

Shershaah: फिल्म 'शेरशाह' की रिलीज को हुए दो साल पूरे, पोस्ट साझा कर सिद्धार्थ बोले- 'ये दिल मांगे मोर'
विज्ञापन

6 of 8
‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
चोरी हो गया नसीर का कैमरा
शूटिंग के आखिरी दिनों में नसीरूद्दीन शाह का कैमरा चोरी हो गया तो बेचारे बहुत दुखी हुए। सबसे अपना दर्द कहते लेकिन सेट पर कोई भी ऐसा दिलदार नहीं था जो कहता, कोई बात नहीं चलो मैं दूसरा कैमरा दिला देता हूं। नसीर को अपना वह कैमरा अब भी याद दिलाओ तो चेहरे पर दर्द बनकर उभर आता है। नसीर के इस फिल्म में साथी थे फक्कड़ कलाकार रवि वासवानी। दोनों की जोड़ी सुधीर- विनोद की जोड़ी के तौर पर कहानी में नजर आई। फिल्म में तब विधु विनोद चोपड़ा और सुधीर मिश्रा दोनों कुंदन शाह की टीम का हिस्सा थे।

Konkona Sen: कोंकणा सेन की मां ने नहीं दी थी रामायण-महाभारत देखने की इजाजत, एक्ट्रेस ने किया वजह का खुलासा
विज्ञापन

7 of 8
‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अनुपम खेर का रोल कट गया
फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ एनएफडीसी का एक स्टोरी कंपटीशन जीतकर बनी थी और एनएफडीसी ने इस फिल्म को बनाने के लिए कुंदन शाह को सात लाख रुपये दिए थे। फिल्म इंस्टीट्यूट के पूरे एक झुंड को जुटाकर कुंदन ने ये फिल्म बनाई और एनएफडीसी से मिला ज्यादातर पैसा फिल्म का स्टॉक खरीदने में खर्च कर दिया। कुंदन शाह की ये फिल्म पहले कट के वक्त करीब छह घंटे की थी और बताते हैं कि इसे पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट के छात्रों ने पहली बार इसी लंबाई के साथ ही देखा था। बाद में इसकी लंबाई कम हुई तो फिल्म से जिन लोगों के किरदार गायब हुए उनमें अनुपम खेर भी शामिल थे।

Bhaiyaaji: 'बंदा' के बाद मनोज बाजपेयी को मिला अपूर्व सिंह कार्की की फिल्म का ऑफर, इस रोल में दिखेंगे अभिनेता
विज्ञापन

8 of 8
‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘ब्लो अप से प्रेरित होकर बनी फिल्म
फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ का मूल विचार कुंदन शाह ने ऑस्कर पुरस्कारों में दो नामांकन हासिल करने वाली 1966 में रिलीज हुई फिल्म ‘ब्लो अप’ से लिया था। फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ में जिस पार्क में सुधीर और विनोद फोटोग्राफी करने जाते हैं, उसका नाम है एंटोनियोनी पार्क। ये फिल्म ‘ब्लोअप’ के निर्देशक का नाम है। पूरा नाम, माइकलेंजेलो एंटोनियोनी। कान फिल्म फेस्टिवल में ‘ब्लोअप’ को पाम ए डिओर यानी कान फिल्म फेस्टिवल का सबसे बड़ा अवार्ड मिला। और, फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ ने कुंदन शाह को दिलाया था बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का नेशनल फिल्म अवार्ड। रवि वासवानी ने भी इस फिल्म के लिए बेस्ट कॉमेडियन का फिल्मफेयर अवार्ड जीता था।


(यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तरह संरक्षित है)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें