अपनी बेटी के साथ अजमेरी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हां, एक बेटी की परवरिश का अधिकार पाना बांग्लादेश में तो बहुत ही मुश्किल रहा होगा?
मेरा मानना है कि कानून हो या संविधान उसे समय की जरूरत के हिसाब से आधुनिक होते रहना चाहिए। इस्लामिक कानून में महिला को किसी बच्चे का संरक्षक बनने लायक नहीं माना जाता है। हजार साल पहले ये बात ठीक भी रही होगी। लेकिन, अब ये मानना कि कोई स्त्री अपनी बड़ी हो रही बच्ची का ख्याल नहीं रख सकती या फिर अपना ही ख्याल नहीं रख सकती, गलत है। मुझे अपनी बच्ची का कानूनी अभिभावक बनने के लिए जो संघर्ष करना पड़ा, वह अपने आप में एक लंबी कहानी है। लेकिन, हां, एक कलाकार अपने जीवन में जिन जिन हालात और तकलीफों से से गुजरता है वह उसके अभिनय को प्रभावित तो करता ही है।