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Abhishek Bachchan:अभिषेक के लिए कामयाबी की डगर आखिर क्यों रही इतनी कठिन? आड़े आया स्टार परिवार से ताल्लुक!

Mon, 05 Feb 2024 05:06 PM IST
दीक्षा पाठक एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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अभिषेक बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया
मेगास्टार बनना कठिन है या किसी का बेटा बनना? बाॅलीवुड में अपने 24 साल के करियर में अभिषेक बच्चन को हमेशा इस सवाल से जूझना पड़ा है। अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के बेटे होने के नाते उन्हें इस तरह के हालात का अक्सर सामना करना पड़ा। अपने अभी तक के फिल्मी करियर में 70 से ज्यादा फिल्में करने के बावजूद, आज भी स्टारकिड के रूप में उन्हें देखना अजीब लगता है। जबकि इन बीतें सालों में, अभिषेक ने अपना बेहतरीन अभिनय दिखाने की कोशिश की, लेकिन खुद की एक अलग पहचान बनाने की राह उनके लिए कठिन रही है।
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अभिषेक बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया
आसान नहीं रही करियर की शुरुआत
बिग बी के बेटे होने के बावजूद, बॉलीवुड में उनकी शुरुआत आसान नहीं रहीं। स्टार फैमिली से होने के कारण लगाई जाने वाली उम्मीदों के डर से कोई  भी निर्देशक उन्हें लॉन्च करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता था। अभिषेक ने हिंदी एक्टर्स राउंडटेबल के दौरान कहा, ‘मुझे लगता है कि मैं लगभग उन सभी निर्देशकों से मिला, जिनसे मिल सकता था, लेकिन उन सभी ने मुझे ना कर दिया। शायद वे मुझे लॉन्च करने की जिम्मेदारी उठाने से हिचक रहे थे।’
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अभिषेक बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया
झेले कई सारे रिजेक्शंस
कई सारे रिजेक्शंस झेलने के बाद, अभिषेक को जेपी दत्ता की ‘रिफ्यूजी’ मिली, जिसमें वह करीना कपूर के साथ अपनी पहली फिल्म में नजर आए। खास बात यह थी कि करीना कपूर ने भी इस फिल्म से अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था। हालांकि, अभिनेता को इस शुरुआती सफलता को भुनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा और उन्होंने ‘तेरा जादू चल गया’, ‘ढाई अक्षर प्रेम के’,‘ओम जय जगदीश’ और ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’ जैसी कई फिल्में कीं। अपने डेब्यू के तीन साल बाद तक अभिषेक खुद को स्थापित करने के लिए पुरजोर कोशिश करते रहे।
 

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अभिषेक बच्चन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
गुरु फिल्म रहा करियर का टर्निंग पाॅइंट
इसके बाद अभिषेक ने कई अच्छी फिल्में कीं चाहे वह 'धूम' हो या 'बंटी और बबली'। फिल्म 'युवा' एक तरह से अभिनेता के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई। 'सरकार' में भी उन्हें एक काॅम्प्लैक्स किरदार निभाने को दिया गया, जिसके साथ उन्होंने पूरा न्याय किया।‘ब्ल्फमास्टर’ और ‘कभी अलविदा न कहना’ में उन्होंने अपने अभिनय की खास छाप छोड़ी। हालांकि, झूम बराबर झूम, लगा चुनरी में दाग जैसी फिल्में बाॅक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा नहीं कर पाईं।
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अभिषेक बच्चन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हमेशा होती आ रही पिता से तुलना
ज्यादातर मौकों पर अभिषेक की तुलना उनके पिता से होती रही। अपने करियर के हर पड़ाव पर उन्हें इस कंपेरिजन का सामना करना पड़ा। इस बारे में अपने एक पुराने इंटरव्यू में अभिषेक ने बताया, ‘मेरे पापा शुरू से बड़े थे, बड़े हैं और आगे भी बड़े रहेेंगे। मैं उनके बराबर खुद को कभी नहीं सोच सकता। न ही कभी भी उस स्टारडम तक पहुंच सकता हूं, जो मेरे पिता ने हासिल किया है। मुझे अपना खुद का रास्ता बनाना है।’

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