अमिताभ बच्चन
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उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना
अमिताभ से सीखा जा सकता है कि हर परिस्थितियों में उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। अमिताभ ने 80 के दशक में अपार सफलता हासिल की और एक ऐसा दौर भी आया कि वह तमाम तरह की उलझनों में उलझ गये। कानूनी लड़ाई से लेकर बोफोर्स घोटाले तक, अमिताभ की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही थी। लेकिन उन्होंने उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ा। 1987 में जब बहुचर्चित बोफोर्स घोटाले को लेकर देशभर में हड़कंप मचा हुआ था, उस वक्त अमिताभ इलाहाबाद से सांसद थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर साल 1984 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी और हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया था।
बोफोर्स घोटाला जब सुर्खियों में आया अमिताभ का भी नाम उछला। उन्हें ‘बोफोर्स दलाल’ तक कहा गया। इससे दुखी होकर उन्होंने राजनीति से इस्तीफा दे दिया और बाद में उन्होंने राजनीति में उतरना अपनी भूल बताया और फिर फिल्मों की तरफ सक्रिय हुए, उम्मीद नहीं हारी और कई सुपरहिट फिल्में दीं।