फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhumi Pednekar Interview: लोग कहते हैं,  ये देख कैसी दिखती है, वो देख इसके शरीर का ये हिस्सा कैसा है?

Wed, 07 Feb 2024 08:46 PM IST
शुभम शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विज्ञापन
1 of 5
भूमि पेडनेकर - फोटो : अमर उजाला

पांच साल हो गए अभिनेत्री भूमि पेडनेकर को अपनी पिछली हिट फिल्म ‘पति, पत्नी और वो’ दिए। तब से उनकी 11 फिल्में रिलीज हो चुकी हैं, लेकिन जिस तरह की फिल्में भूमि की शख्सियत पर फबती हैं, उनकी नई फिल्म ‘भक्षक’ ठीक वैसी ही है। ये फिल्म सिनेमाघरों की बजाय सीधे ओटीटी नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो रही है। बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टरहोम कांड पर बनी इस फिल्म में भूमि ने एक पत्रकार की भूमिका निभाई है। उनसे चार बातें..
 

विज्ञापन

2 of 5
भूमि पेडनेकर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

परिपूर्ण होने में आपको कितना यकीन है?
जीवन में किसी कौशल में परिपूर्ण होना क्या होता है, मुझे नहीं पता क्योंकि मैंने अभी तक ये पाया नहीं है। मुझे लगता है कि जीवन में अपूर्ण होना भी बहुत ही सुंदर होता है। मैं जानती हूं कि ये कुछ कुछ कविता कहने जैसा है लेकिन सच में मेरा यकीन है इसमें।

विज्ञापन

3 of 5
भूमि पेडनेकर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सोशल मीडिया पर जो टिप्पणियां होती हैं, उनके बारे में आपकी प्रतिक्रिया क्या होती है?
मैं ये भी जानती हूं कि मेरे शरीर सौष्ठव को लेकर सोशल मीडिया पर खूब मीम्स बनते हैं। लोग कहते हैं, कि ये देख कैसी दिखती है, वो देख, इसके शरीर का ये हिस्सा कैसा है? मैं कोशिश करती हूं कि इन सब बातों से मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर असर न पड़े लेकिन फिर सच ये भी है कि मिनट, दो मिनट के लिए ही सही पर असर तो होता ही है।

Esha Deol: चार साल पहले ही ईशा ने दिया था तलाक का इशारा, दूसरी बेटी के जन्म के बाद बदलने लगा था भरत का व्यवहार

4 of 5
भूमि पेडनेकर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

तो सबसे सुरक्षित आप अपने आपको कहां महसूस करती हैं?
कैमरा मेरा सबसे सच्चा साथी है। जब मैं कैमरे के आगे होती हूं न, तो मुझे लगता है कि सबसे सुरक्षित स्थान मेरे जीवन में यही है। ये मेरे लिए मुक्ति का माध्यम है। ये इसलिए भी हो सकता है कि जो किरदार मैं कर रही हूं, वह मैं हूं नहीं। लेकिन, मेरी अभिनय यात्रा ने मुझे खुद को स्वीकारने में बहुत मदद की है।

Guru Randhawa: गुरु रंधावा का बेबाक बयान, ‘हां, हम एक ही सूबे से हैं, लेकिन धरम जी तो एक्टिंग के भगवान हैं’

विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
भूमि पेडनेकर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जीवन में खुश रहने को कितना जरूरी मानती हैं आप?
मेरी तो सबको यही सलाह रहती है कि खुद को खुश रखना बहुत जरूरी है। खुद को खुश नहीं रखोगे तो आसपास कोई खुश नहीं होगा। और, ये जो काम का दबाव है ये तो हमेशा बढ़ता ही रहेगा। छोटी छोटी जीत ही हमारी खुशियां बनती हैं और हमारी खुशियां ही हमारे चेहरे की आभा बन जाती हैं।

Anupam Kher: आगरा का हलवाई बनकर गदगद हुए अनुपम खेर, मुंबई से भेजा ताजनगरी को ये प्यार भरा संदेश

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें