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Indira Tiwari: इंदिरा को प्रचार से दूर रखने से ‘बस्तर’ को नुकसान, साइड हीरो के लाइमलाइट पाने के रोचक किस्से

Sat, 16 Mar 2024 03:30 PM IST
शुभम शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Indira Tiwari - फोटो : अमर उजाला

हिंदी फिल्मों की ज्यादातर कहानियां फिल्म के नायक, नायिका और खलनायक को ही ध्यान में लिखी जाती है। लेकिन इन फिल्मों में कुछ किरदार ऐसे भी होते है जो फिल्म में मुख्य किरदार निभाने वाले अभिनेता और अभिनेत्रियों पर भारी पड़ जाते है। इस हफ्ते रिलीज हुई फिल्म 'बस्तर द नक्सल स्टोरी' के साथ भी ऐसा ही हुआ। जिसने भी ये फिल्म देखी सबने फिल्म को एक ऐसी मां की कहानी बताया जिसका बेटा नक्सलियों के साथ चला जाता है। लेकिन, फिल्म का प्रचार अदा शर्मा को हीरोइन बताकर हुआ जबकि पूरी फिल्म में सर्वोच्च न्यायालय में उन्हीं के खिलाफ मुकदमा चलता रहता है। फिल्म में चर्चित कलाकारों से ज्यादा हाशिये पर रखे गए कलाकारों को शोहरत मिलने का ये पहला मामला नहीं है, लेकिन शुरूआत करते हैं, फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ से...
 

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बस्तर द नक्सल स्टोरी’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इंदिरा तिवारी
निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और निर्देशक निर्देशक सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ में भले ही अदा शर्मा की लीड भूमिका है, लेकिन इस फिल्म में सबसे ज्यादा तालियां जिस एक अभिनेत्री को मिली हैं, वह हैं इंदिरा तिवारी। फिल्म का असली संघर्ष भी उन्हीं का किरदार झेलता है और ये उनका किरदार रत्ना ही है जो कहानी को उसके उपसंहार तक पहुंचाता है। फिल्म में इंदिरा तिवारी ने एक ऐसी आदिवासी महिला रत्ना कश्यप का किरदार निभाया है, जिसके पति को नक्सलियों ने सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि उसने भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने की हिम्मत की थी। तकरीबन सारे फिल्म समीक्षकों ने इंदिरा तिवारी को फिल्म की असली हीरोइन माना है और उनके अभिनय की खूब तारीफ की है।

 

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शैतान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आर माधवन
फिल्म 'शैतान' में देखा जाए तो फिल्म के हीरो अजय देवगन है, लेकिन पूरी वाहवाही अभिनेता आर माधवन लूट ले गए। पिछले महीने रिलीज हुई विकास बहल के निर्देशन में बनी यह फिल्म गुजराती फिल्म ‘वश’ की रीमेक है। इस फिल्म में आर माधवन ने एक तांत्रिक की भूमिका निभाई है जो एक किशोरी को वशीकरण से अपने वश में कर लेता है। आर माधवन ने इस फिल्म में कमाल का अभिनय किया है उन्होंने अपने किरदार को बहुत ही गहराई से निभाया है।

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बरेली की बर्फी' - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

राजकुमार राव
18 अगस्त 2017 को रिलीज हुई  फिल्म 'बरेली की बर्फी' में अभिनेता आयुष्मान खुराना की लीड भूमिका थी और अभिनेता राजकुमार राव साइड भूमिका में नजर आए थे। लेकिन इस फिल्म में  रजकुमार राव ने प्रीतम विद्रोही की भूमिका अपनी शानदार एक्टिंग से लोगो के दिलों को जीत लिया था। अश्वनी अय्यर तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म के लिए अभिनेता राजकुमार राव को  बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर और स्क्रीन अवार्ड मिला था।

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हैदर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इरफान खान
निर्माता -निर्देशक विशाल भारद्वाज की फिल्म 'हैदर' (2014) में मुख्य भूमिका अभिनेता शाहिद कपूर की थी लेकिन छोटी सी ही भूमिका में पूरी लाइम लाइट दिवंगत अभिनेता इरफान खान लूट ले गए। इस फिल्म में इरफान खान ने रूहदार की भूमिका निभाई थी जिसके जरिए हैदर को अपने पिता के बारे में सुराग मिलता है। फिल्म में इरफान खान की एंट्री के पहले फिल्म बहुत ही धीमी लगती है, लेकिन उनके आते ही फिल्म का स्तर ऊंचा उठ जाता है। ऐसा लगता है कि काश इरफान खान का रोल और लंबा होता। 

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फुकरे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पंकज त्रिपाठी
निर्देशक मृगदीप सिंह लांबा की फिल्म 'फुकरे' (2013) में अभिनेता पंकज त्रिपाठी की भूमिका पुलकित सम्राट, अली फजल, मनजोत सिंह और ऋचा चड्ढा के मुकाबले छोटी थी। लेकिन पंडित की भूमिका निभाकर पंकज त्रिपाठी सभी पर भारी पड़े और इस फिल्म की हर फ्रेंचाइजी में उनका किरदार और भी सशक्त होता गया। फिल्म 'फुकरे' की मूल कड़ी पंकज त्रिपाठी का किरदार पंडित ही था।

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डर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

शाहरुख खान
निर्माता- निर्देशक यश चोपड़ा की फिल्म 'डर' (1993) में सनी देओल हीरो थे, लेकिन इस फिल्म में नकारात्मक भूमिका निभाकर शाहरुख खान भारी पड़े। इस फिल्म में शाहरुख खान ने राहुल मेहरा की भूमिका निभाई थी। शाहरुख खान से पहले यह भूमिका आमिर खान को ऑफर की गई थी, लेकिन नकारात्मक भूमिका की वजह से आमिर खान ने फिल्म छोड़ दी। इस फिल्म में शाहरुख खान ने इस जुनूनी मनोरोगी की भूमिका बखूबी निभाई थी। इस फिल्म में  शाहरुख खान ने अपने "क..क... क... किरण" डायलॉग को ट्रेडमार्क किया था जो आज भी लोकप्रिय है।

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दामिनी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सनी देओल
निर्देशक राजकुमार संतोषी की फिल्म 'दामिनी' (1993) अभिनेता सनी देओल के करियर की सबसे यादगार फिल्म है। देखा जाए तो इस फिल्म के हीरो अभिनेता ऋषि कपूर थे। इस फिल्म में फिल्म में सनी ने एक वकील की भूमिका निभाई थी। फिल्म में वह सेकंड हाफ के बाद आते हैं लेकिन दमदार डायलॉग और एक्टिंग के चलते सभी पर भारी पड़ते हैं। इस फिल्म के लिए सनी देओल को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था। फिल्म में उनका डायलॉग तारीख पर तारीख और ये ढाई किलो का हाथ आज भी काफी लोकप्रिय है।

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अंधा कानून - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अमिताभ बच्चन
निर्देशक टी. रामा राव की फिल्म 'अंधा कानून' (1983) में रजनीकांत, हेमा मालिनी और रीना रॉय की मुख्य भूमिका थी और अमिताभ बच्चन इस फिल्म में एक विशेष भूमिका जां निसार खान में नजर आए थे। लेकिन जब यह फिल्म रिलीज हुई तो इस फिल्म से ज्यादा लोकप्रियता अमिताभ बच्चन को मिली। अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म में एक वन अधिकारी जां निसार खान की भूमिका निभाई थी जिसे एक हत्या के आरोप में 20 साल की सजा हो जाती है।

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मेरा गांव मेरा देश - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

विनोद खन्ना
निर्देशक राज खोसला की फिल्म 'मेरा गांव मेरा देश' (1971) में धर्मेंद्र मुख्य भूमिका में थे और फिल्म में दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना ने डाकू जब्बर सिंह का किरदार निभाया था। डाकू के किरदार में विनोद खन्ना लोगों को डराने में भी कामयाब हुए। विनोद खन्ना का यह किरदार धर्मेंद्र के किरदार के मुकाबले काफी सशक्त था। विनोद खन्ना के डाकू के किरदार ने बॉलीवुड में धूम मचा दी और वो एक दौर आया, जब कई सारी फिल्में डाकुओं के आस-पास लिखी गई।

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आनंद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अमिताभ बच्चन
निर्देशक हृषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'आनंद' (1971) बॉलीवुड की क्लासिक फिल्मों में से एक मानी जाती है। राजेश खन्ना उस समय सुपर स्टार थे और फिल्म में उनकी मौजूदगी फिल्म की हिट होने की गारंटी माना जाता था। वहीं, अमिताभ बच्चन सफल होने के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने डा. भास्कर की भूमिका निभाई थी जो कैंसर से पीड़ित आनंद सहगल बने राजेश खन्ना का इलाज करते हैं। जब यह फिल्म रिलीज हुई तो राजेश खन्ना से ज्यादा लोकप्रिय अमिताभ बच्चन हुए।

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