कोरोना से संक्रमित मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थेरैपी ने एक नई उम्मीद जगाई है। बता दें कि दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती चीर मरजों पर प्लाज्मा थेरैपी के ट्रायल के शुरुआती नतीजे सकारात्मक हैं। चार में से दो मरीजों की हालत में सुधार हुआ है।
इसके लिए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने बीमारी से उबर चुके लोगों से प्लाज्मा दान करने की अपील की है। सीएम ने कहा कि इस थेरैपी में दानदाता का रोल काफी अहम है। जो मरीज ठीक हो चुके हैं उन्हें सरकार फोन करेगी। अगर वे प्लाज्मा देने के लिए सहमति देंगे तो उन्हें अस्पताल लाने की अस्पताल लाने की व्यवस्था की जाएगी।
आखिर क्या है ये प्लाज्मा थेरैपी? कैसे होता है इसका इस्तेमाल? कोरोना वायरस के मरीजों पर कैसे करता है असर? इन सभी सवालों के जवाब आपको आगे की स्लाइड में मिल जाएंगे।
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प्लाज्मा थेरैपी
- फोटो : social media
सरीन के मुताबिक, प्लाज्मा तकनीक काफी पुरानी तकनीक है। इसका दशकों से इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास कोरोना का कोई इलाज नहीं है, लिहाजा यह गंभीर कोरोना मरीजों के लिए मददगार होगा।
प्लाज्मा देन करना देशभक्ति है। इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा और न ही कोई कमजोरी होगी।
क्या है प्लाज्मा थेरैपी?
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डॉक्टर इलाज करते हुए (फाइल फोटो )
- फोटो : पीटीआई
प्लाज्मा थेरैपी के तहत ठीक हो चुके लोगों के प्लाज्मा को मरीजों से ट्रांसफ्यूजन किया जाता है।
थेरैपी में एटीबॉडी का इस्तेमाल किया जाता है, जो किसी वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ शरीर में बनता है।
यह एंटीबॉडी ठीक हो चुके मरीज के शरीर से निकालकर बीमार शरीर में डाल दिया जाता है।
मरीज पर एंटीबॉडी का असर होने पर वायरस कमजोर होने लगता है। इसके बाद मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।
एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि प्लाज्मा थेरैपी को इलाज का एक तरीका करार देते हुए कहा कि इसे जादुई गोली की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह कोरोना का एक मात्र इलाज नहीं है । यह सभी मरीजों पर कारगर नहीं होगा क्योंकि कोरोना से संक्रमित लोगों के साथ कई दूसरी चीजें भी होती हैं। वहीं ठीक होने के 14 दिन पर खूव देने वाले मरीजों में सही एंटीबॉडी का होना भी जरूरी है। हमें मरीजों के इलाज मेें सतर्कता बरतनी होगी।