यूपी बोर्ड।
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लेकिन समस्या यह भी
इस आदेश के बाद स्कूलों के सामने एक समस्या खड़ी हो गई है। गत वर्ष कक्षा 09 के छात्रों को प्रमोट कर दिया गया था, कई स्कूल ऐसे थे जो वार्षिक परीक्षा नहीं करा पाए थे। ऐसे स्कूलों के पास छात्रों के अंक नहीं होंगे। वहीं, बोर्ड की यह व्यवस्था भी पहली बार है, जिसमें पूर्ववर्ती कक्षा के प्राप्तांक पूछे गए हों। अधिकांश स्कूलों के पास कक्षा 09 के अंकों का रिकॉर्ड भी जल्दी से उपलब्ध नहीं होगा। ऐसी परिस्थिति में स्कूल मनमाने अंक अपलोड कर सकते हैं। इनके फलस्वरूप कक्षा 10वीं के परिणाम में छात्रों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।