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इस परिवार के नाम है नोबेल जीतने का रिकॉर्ड, जानें पति-पत्नी ने मिलकर जीते कितने पुरस्कार

Thu, 10 Oct 2019 08:15 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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नोबेल पुरस्कार विजेता परिवार - फोटो : सोशल मीडिया
रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा हो गई है। जॉन बी- गुडएनफ, एम स्टैनली विटिंघम, और अकीरा योशिनो को लीथियम आयन बैटरी विकसित करने के लिए नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है। 

इस मौके पर हम आपको उस परिवार के बारे में बता रहे हैं जिनके नाम पर नोबेल जीतने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। वो परिवार जिसने अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा नोबेल पुरस्कार जीते हैं। इस बारे में आगे की स्लाइड्स में पढ़ें।
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मेरी क्यूरी - फोटो : nobelprize.org
ये रिकॉर्ड क्यूरी परिवार के नाम पर दर्ज है। नोबेल पुरस्कारों के इतिहास में 'क्यूरी परिवार' ने सबसे ज्यादा नोबेल जीते हैं। इसकी शुरुआत हुई थी मेरी क्यूरी (मैडम क्यूरी - Madam Curie) और उनके पति पिअरे क्यूरी से। आगे की स्लाइड्स में हम आपको बता रहे हैं कि क्यूरी परिवार के किन सदस्यों को, किस काम के लिए कब और कितनी बार नोबेल दिया गया है। साथ ही देखें हर सदस्य की तस्वीर।
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मेरी क्यूरी और पिअरे क्यूरी - फोटो : wiki

मेरी क्यूरी और पिअरे क्यूरी

  • मेरी (स्क्लोदोव्स्का) क्यूरी फ्रांस की नागरिक थीं। उनका जन्म 7 नवंबर 1867 को पोलैंड में हुआ था। 
  • उनके पिता गणित और भौतिक विज्ञान (Physics) के अध्यापक थे। मेरी 9 साल की थीं जब उनकी मां की मृत्यु हो गई।
  • 1891 में मेरी पढ़ाई के लिए पेरिस चली गईं। वहां पूरा दिन विवि की प्रयोगशाला में बितातीं और देर रात तक परीक्षाओं की तैयारी करतीं।
  • 1894 में स्नातक होने के बाद उनकी मुलाकात प्रतिभाशाली फ्रांसीसी रसायनविद पिअरे क्यूरी से हुई। दोनों ने शादी कर ली।
  • उन्हीं दिनों फ्रांस के एक भौतिकविज्ञानी बेक्यूरेल ने यूरेनियम के लवणों कुछ किरणों के उत्सर्जन का पता लगाया था।
  • मेरी और उनके पति इस खबर से उत्साहित हुए और दोनों ने इस दिशा में काम करना शुरू किया। उन्होंने यूरोनियम से 100 गुना ज्यादा रेडियोधर्मी तत्व की खोज की। उसे पोलैंड से प्रेरित नाम दिया - 'पोलोनियम'। चार साल लगातार प्रयोग के बाद दोनों मिलकर 1902 में 1/10 ग्राम रेडियम निकाल पाए।
  • इसके बाद 1903 में मेरी और पिअरे क्यूरी को संयुक्त रूप से भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया।

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मेरी क्यूरी - फोटो : npr.org

मेरी क्यूरी

1906 में एक सड़क दुर्घटना में पिअरे क्यूरी की मृत्यु हो गई। लेकिन पति को खोने के बाद भी मेरी क्यूरी ने अपना साहस नहीं खोया था। उन्होंने अपना शोधकार्य जारी रखा। कुछ ही समय बाद परमाणु से संबंधित खोज के लिए उन्हें रासायन विज्ञान के क्षेत्र में 1911 में दोबारा नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

लेकिन लगातार रेडियोधर्मी तत्वों के बीच रहने के कारण उन्हें ल्यूकीमिया (ब्लड कैंसर) हो गया और उनकी मृत्यु हो गई।

...लेकिन जारी रहा परिवार के नोबेल जीतने का सफर, आगे पढ़ें कैसे

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जोलिओट क्यूरी आइरेन और फ्रेडरिक जोलिओट (बीच में) - फोटो : nobelprize.org

जोलिओट क्यूरी आइरेन

जोलिओट क्यूरी आइरेन मेरी और पिअरे क्यूरी की बेटी थीं। उनकी औपचारिक शिक्षा ज्यादा नहीं थी। लेकिन वे अनौपचारिक कक्षाओं में जाती थीं जहां भौतिक विज्ञान की पढ़ाई होती थी। बाद में वह अपनी मां के रेडियम इंस्टीट्यूट में बैठकर शोधकार्य करने लगीं। 

1926 में आइरेन क्यूरी ने फ्रेडरिक जोलिओट से शादी की। दोनों पति-पत्नी ने मिलकर मनुष्य द्वारा निर्मित रेडियोएक्टिव तत्व से संबंधित खोज कर डाली। अपनी मां की तरह उन्होंने भी वैज्ञानिकों की एक पीढ़ी तैयार की। विकिरण के करीब लंबे समय तक काम करने के कारण 1956 में उनकी मृत्यु भी ल्यूकीमिया के कारण हो गई।

1935 में पति-पत्नी जोलिओट क्यूरी आइरेन और फ्रेडरिक जोलिओट को रासायन विज्ञान के लिए नोबेल दिया गया।
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जोलिओट फ्रेडरिक - फोटो : nobelprize.org

फ्रेडरिक जोलिओट

फ्रेडरिक पेरिस के एक व्यापारी के पुत्र थे। एक स्टील कंपनी में प्रोडक्शन इंजीनियर के रूप में कुछ महीने काम करने के बाद रासायन विज्ञान का अध्ययन किया। फिर मेरी क्यूरी के रेडियम इंस्टीट्यूट में उनके शोध सहयोगी के रूप में काम करने लगे। इसी दौरान वह मेरी क्यूरी की बेटी आइरेन क्यूरी से मिले। बाद में दोनों ने शादी कर ली।

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