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क्या होती है पराली? कैसे खराब करती है ये हवा की गुणवत्ता, जानिए इसके समाधान और अन्य उपयोग

Tue, 17 Nov 2020 06:25 PM IST
शुभांगी गुप्ता एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

सर्दियां शुरू हो चुकी हैं और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में एक बार फिर वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। इस स्तर को बढ़ाने का आरोप दिल्ली से सटे राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों पर है, जो पराली जलाते हैं। ऐसे में एनजीटी ने अपने एक फैसले में दिल्ली-एनसीआर में 9 से 30 नवंबर तक पटाखों के उपयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया। यह आदेश देश के उन सभी शहरों में लागू है, जहां वायु की गुणवत्ता खराब या उससे ऊपर की श्रेणी में आती है। इस रिपोर्ट में हम जानते हैं कि आखिर यह पराली होती क्या है? इसे जलाने से हवा की गुणवत्ता खराब कैसे हो जाती है? क्या जलाए बिना पराली से निपटने का कोई रास्ता है? 

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क्या होती है पराली?

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खेतों में धान (चावल) की फसल काटे जाने के बाद बचने वाले अवशेष को पराली कहते हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान की फसल सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में गेहूं की फसल की बुवाई के लिए किसानों को खेतों की सफाई कर इस पराली को हटाना पड़ता है। किसान जल्दबाजी में पराली को जलाकर गेहूं की बुवाई शुरू कर देते हैं, लेकिन किसानों की यही जल्दबाजी हवा की गुणवत्ता को खराब कर देती है।

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दूषित हवा सेहत के लिए बेहद हानिकारक

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चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार पराली जलाने के बाद दूषित हुई हवा में सांस लेने से लोगों के फेफडे़ खराब हो रहे हैं। ग्रीनपीस साउथ ईस्ट एशिया की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल 10 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण हो रही है। देश में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण जीवाश्म ईंधन का बढ़ता उपयोग होने के साथ जलाई जाने वाली पराली भी है। ऐसे में देश में लोगों का जीवन सिकुड़ता जा रहा है।

स्मॉग शब्द कैसे आया चलन में और क्या हैं इसके मायने?

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स्मॉग एक तरह की धुंध होती है जो कि स्मोक यानि धुएं की वजह से पैदा होती है। इसी वजह से इसे स्मॉग कहा जाता है। स्मॉग शब्द का प्रयोग सबसे पहले 1905 में डॉ हेनरी अंतोइन डे वू ने किया था। 
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पराली से निपटने के विकल्प

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किसान पराली का उपयोग छप्पर बनाने या मवेशियों का बिस्तर बनाने में कर सकते हैं। एक विकल्प बिजली पैदा करने के लिए पराली से बायोमास पैदा करना है। इसी तरह भूसे का उपयोग मशरूम की खेती के काम करने वाले छर्रों को बनाने में किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सरकार को प्रयास करने होंगे। एक रिपोर्ट के अनुसार, पराली को अगर बहुत दिनों तक जमीन पर ही छोड़ दिया जाए तो मिट्टी में सूक्ष्मजैविकों की रासायनिक अभिक्रिया बढ़ सकती है और मिट्टी उपजाऊ हो सकती है, लेकिन इसमें समय अधिक लगता है। इस कारण किसान जल्दबाजी में पराली को जलाना उचित समझते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि तकनीक के जरिए ऐसे उत्पादों का निर्माण कराया जाए, जिनसे पराली जल्दी गल जाए और किसानों को उनके उपयोग के लिए प्रेरित करें।

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