जमा देने वाली ठंड, अगल-बगल होते धमाके, बॉर्डर पार करने में 45 किमी का पैदल सफर। जब मंजिल दिखी भी, तो यूक्रेन पुलिस ने बंदूक की नोक पर ले लिया। एक बार लगा कि रूस के धमाकों से तो वह बच गई, लेकिन अब जान से हाथ धोना पड़ेगा। काफी देर तक मान-मनौव्वल के बाद पुलिसकर्मी शांत हो सका। यूक्रेन से वाया पोलैंड आईजीआई एयरपोर्ट पर पहुंची चाहत ने अपनी खौफनाक दस्तां बयां की। बोलते वक्त हकीकतन वह रो रही थी। मां का दुलार भी काम नहीं कर रहा था। बगल में खड़ी सना के चेहरे पर युद्ध का खौफ साफ दिख रहा था। आखें फटी हुई थीं। हलक हुआ था। जुबान से शब्द नहीं निकल रहा था।