गोकुलपुरी गांव की झुग्गियों को जिस समय आग की लपटों ने घेरा तो बबलू का पूरा परिवार सुरक्षित बाहर निकल आया था। लेकिन, अगले ही पल परिवार जान जोखिम में डालकर फिर से मौत के मुंह में कूद गया था। परिवार का कोई सदस्य घर का सामान तो कोई अमित उर्फ शहंशाह को खोजने में लग गया था। लेकिन, बबलू के माता-पिता, भाई सुजीत, दो बहनें रबीना और संगीता ही मौत को चकमा दे सके। वहीं, बचा हुआ परिवार काल के गाल में समा गया।