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आंदोलन के 100 दिन: किसानों ने बंद किए दिल्ली के बॉर्डर-हाईवे, देहात की गलियां बनीं सहारा

Sat, 06 Mar 2021 08:04 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे - फोटो : अमर उजाला
किसान आंदोलन से दिल्ली की सीमाओं की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जिन रास्तों पर कभी वाहन तेज फर्राटा भरते थे अब वहां बैरिकेडिंग के साथ भारी पुलिस फोर्स तैनात है। हाइवे बंद होने से गांव की पगडंडियां अब वैकल्पिक रास्ता बन गई हैं। आंदोलन का असर आर्थिक रूप से भी लोगों पर पड़ा है। इस कड़ी में जहां कुछ लोगों ने बॉर्डर के इलाकों को छोड़ दिया  है तो कुछ लोगों ने इसे अवसर के तौर पर भुनाया। दिल्ली के गाजीपुर, टिकरी और सिंघु बॉर्डर कि मौजूदा स्थिति पर पेश है रिपोर्ट।
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किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे - फोटो : अमर उजाला
गाजीपुर बॉर्डर
गाजीपुर बॉर्डर उत्तर प्रदेश और दिल्ली का बॉर्डर है। यहां एनएच-9( दिल्ली मेरठ हाइवे) से रोजाना लाखों लोग दिल्ली आना-जाना करते हैं। आंदोलन की शुरुआत में गाजियाबाद से दिल्ली जाने वाला रास्ता बंद था, लेकिन 26 जनवरी की घटना के बाद से बॉर्डर पूरी तरह सील हो गया है। हाइवे की सभी 14 लेन बंद हैं और आधे से ज्यादा रास्ते पर किसान जमे हैं। 
 
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गाजीपुर बॉर्डर का हाल - फोटो : अमर उजाला
रास्ते बंद होने से लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिस बॉर्डर को पार करने में पहले पांच मिनट का समय लगता था। अब अन्य रास्तों से जाने के कारण आधे घंटे से अधिक का समय लग रहा है। आंदोलन का एक दूसरा पहलू ये भी है कि बॉर्डर के आसपास रहने वाले गरीब लोगों को किसानों के लंगरों में तीनों समय का खाना मिल रहा है। बॉर्डर अब एक कस्बे का रूप ले चुका है। फिलहाल किसानों के लिए यह स्थान उनका घर है। 

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कंटीले तारों से बंद किया गया सिंघु बॉर्डर - फोटो : अमर उजाला
सिंघु बॉर्डर
सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन का व्यापक असर पड़ा है। इस असर की वजह से यहां की तस्वीर भी पूरी तरह से बदल गई है। आंदोलन से पहले दिल्ली की सीमा को पार करने व प्रवेश के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग से ही आवाजाही होती थी, लेकिन आंदोलन शुरू होने से यहां का रास्ता ही बदल गया है। द्वारका और नजफगढ़ के रास्ते वाहन हरियाणा में प्रवेश कर रहे हैं। 
 
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जंगल के रास्ते जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
जो गाड़ियां पहले हाइवे पर फर्राटा भरते हुए जाती थी। अब यह स्थिति नहीं रही है। आंदोलन की वजह से मुख्य मार्ग बंद होने के कारण अब गांव देहात की गलियां आवाजाही का प्रमुख जरिया है। आंदोलन के तीन माह के बाद अब पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाते हुए धरना स्थल से करीब तीन किलोमीटर पहले ही रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया है।  
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टिकरी बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाई गई - फोटो : एएनआई
टिकरी बॉर्डर 
टिकरी बॉर्डर दिल्ली और हरियाणा की सीमा है। यहां टिकरी मैट्रो स्टेशन से लेकर रोहतक रोड तक किसान डेरा जमाए बैठे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 पर किसान जमे हुए हैं। इस मार्ग पर दोनों ओर औद्योगिक क्षेत्र है। आंदोलन के कारण यहां आने वाले व्यवसायिक वाहनों को दूसरे रास्तों के जरिए यहां आना पड़ रहा है। इससे समय और इंधन की बर्बादी हो रही है।
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दिल्ली से सोनीपत की ओर जाने के लिए लोगों को खेतों का सहारा लेना पड़ रहा है - फोटो : अमर उजाला
हालांकि, आंदोलन के चलते आसपास के रहने वाले लोगों को कुछ फायदा भी हो रहा है। बॉर्डर पर दिल्ली के आखिरी गांव टिकरी कलां में रहने वाले लोगों के घरों में कई किसानों ने किराए पर कमरे ले रखे हैं। इससे इन लोगों को आर्थिक मदद मिल रही है। 
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