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कौन है पंखुड़ी पाठक, जिसने सपा की प्रवक्ता सूची से बाहर होते ही दिया इस्तीफा और मचा बवाल

Tue, 28 Aug 2018 06:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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pankhudi pathak
सपा के मीडिया पैनलिस्ट की नई सूची जारी होते ही निवर्तमान पैनलिस्ट पंखुरी पाठक ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सपा पर अपने समाजवादी सिद्धांतों को छोड़ देने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब वहां रहने से दम घुटता है। सोमवार को सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने 24 नेताओं की सूची जारी कर दी। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में यही नेता पार्टी का पक्ष रखने के लिए अधिकृत होंगे। 
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पंखुरी पाठक ने ट्वीट करते हुए कहा कि 8 साल पहले वो सपा की विचारधारा व युवा नेतृत्व से प्रभावित होकर मैं इस पार्टी से जुड़ी थी। लेकिन, आज न वह विचारधारा दिखती है और न ही वह नेतृत्व। जिस तरह की राजनीति चलती है, उसमें दम घुटता है। कभी जाति और कभी धर्म तो कभी लिंग को लेकर जिस तरह की अभद्र टिप्पणियां की जाती हैं, पर पार्टी नेतृत्व सबकुछ जानकर भी शांत रहता है। 
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यह दिखता है कि नेतृत्व ने भी इस स्तर की राजनीति को स्वीकार कर लिया है। ऐसे माहौल में अपने स्वाभिमान के समझौता करके पार्टी में बने रहना मुमकिन नहीं रह गया था। पंखुरी पाठक कहती हैं, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मैंने नेता और आदर्श ही नहीं, एक बड़ा भाई भी माना है। इसलिए गलत दिशा में पार्टी को जाते देख मुझे दुख होता है। पार्टी में आज न लोकतंत्र बचा है और न कार्यकर्ता का सम्मान। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दल से जुड़ने की नहीं सोच रही हैं। अब अपना पूरा ध्यान उच्च शिक्षा पूरी करने पर देंगी।

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पंखुड़ी ने ट्विटर पर लिखे ये कमेंट....
बाकी मेरे लिए सबसे ज़रूरी है कि मैं अपनी बारे में क्या सोचती हूं। लोगों की सोच तो समय समय पर बदलती रहती है। लेकिन मुझे सबसे पहले अपने आओ को जवाब देना है। इस अपमान और द्वेष से भरे माहौल के बीच मैं खुद को जवाब नहीं दे पा रही थी। कोई भी सभ्य परिवार का व्यक्ति नहीं दे सकता।
 

 
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हो सकता है लखनऊ के कुछ वरिष्ठ नेताओं से संबंधों के कारण आपको बस उनका वर्जन मिला हो। लेकिन सपा से अपने वैचारिक मतभेद को मैं काफी समय से सोशल मीडिया पर उठा रही हूं। राष्ट्रीय अध्यक्ष जी द्वारा अपने फेसबुक आईडी से ब्राह्मण विरोधी पोस्ट शेयर करने पर मैंने कड़ी आपत्ति जताई थी।
 


 
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फैसला तो मैंने बहुत पहले ही कर लिया था। लेकिन एक उम्मीद थी की शायद राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से कोई बात हो सके। कल ही सुबह अपने द्वारा संचालित किया जा रहा #ISupportAkhilesh अभियान भी बंद किया था। इस्तीफा लिख कर तैयार रखा था। लेकिन लिस्ट के आने पर समझ आ गया कि अब समय आ ही गया है। सामाजिक न्याय की लड़ाई और मजबूत की जाएगी । अब तो किसी तरह की पाबंदी भी नहीं । 
 

 
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pankhuri pathak
समाजवादी पार्टी ने अगर इतनी मेहनत भाजपा को टार्गेट करने में लगाई होती जितनी कि यह एक 26 वर्ष की महिला को पिछले 2 साल से टार्गेट करने में लगा रहे हैं तो शायद 2017 के परिणाम कुछ अलग होते। अभी भी ध्यान बस पार्टी की आंतरिक छुट मुट राजनीति में है। अफसोस इससे ऊपर नहीं उठ पाओगे।
 

 

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pankhuri pathak
अंगूर खट्टे नहीं अंगूर सड़ गए हैं। जितनी टिप्पणी मुझ पर कर रही हैं उतनी नेताजी और शिवपाल जी पर भी कर लीजिए क्योंकि वह भी यही बात कर रहे हैं जो मैं कर रही हूं। बाकी अगर सोच रही हैं कि मुझ पर टिप्पणी कर के सपा में प्रसिद्ध हो जाएंगी या दो चार सपाई जान जाएंगे तो लगी रहिए। शुभकामनाएं। 
 

 

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आपको बता दें कि पंखुड़ी पाठक दिल्ली यूनिवर्सिटी में लॉ की छात्रा हैं। पिछले साल यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उन्हें पार्टी का प्रवक्ता बनाया था। पंखुड़ी पाठक समाजवादी पार्टी से छात्र संघ का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। 2010 में हंसराज कॉलेज के चुनाव में उन्होंने ज्वाइंट सेक्रेटरी पद का चुनाव जीता। 
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- फोटो : सोशल मीडिया
पंखुड़ी पाठक ने साल 2010 में समाजवादी पार्टी ज्वाइन की और अखिलेश यादव की क्रांति रथ यात्रा में भी हिस्सा लिया था। गौरतलब है कि दिल्ली में रहने वाली पंखुड़ी पाठक किसी राजनीतिक परिवार का हिस्सा नहीं हैं, उनके पिता जेसी पाठक और मां आरती पाठक हैं, मां-बाप दोनों ही डॉक्टर हैं, वो जो निजी प्रैक्टिस करते हैं।
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