उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता ने शुक्रवार की रात 11.40 बजे सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया। उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी के लिए करीब 44 घंटे तक जूझी, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। उसकी हालत देख डॉक्टरों की भी आंखें नम हो रही थीं।
विज्ञापन
2 of 5
unnao rape burning case
- फोटो : अमर उजाला
बर्न यूनिट के प्रमुख डॉ. शलभ और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि पीड़िता को वेंटिलेटर पर रखा गया था। क्यों नब्बे फीसदी तक जलने से उसके शरीर से काफी तरल पदार्थ बह चुका था और बचना मुश्किल था। हमने पूरी कोशिश की। डॉक्टों ने बताया कि थोड़ी-बहुत बात करते-करते वह बेहोश हो रही थी। उसके महत्वपूर्ण अंग शाम तक काम कर रहे थे, लेकिन हालत लगातार गिर रही थी। पीड़िता को गुरुवार देर रात लखनऊ के सिविल अस्पताल से एयरलिफ्ट करके सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
विज्ञापन
3 of 5
unnao rape burning case
- फोटो : अमर उजाला
सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनील गुप्ता का कहना है कि पीड़िता का शरीर 90 फीसदी आग की चपेट में आने के कारण उसे पहचान पाना भी मुश्किल हो रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि उसने इशारों में और हल्की आवाज में कहा कि वह मरना नहीं चाहती है। उसने यह भी कहा कि उसके साथ ऐसा करने वाला कोई बचे न। थोड़ी बहुत बात करते -करते वह पूरी तरह से निढाल हो गई।
4 of 5
unnao rape burning case
- फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर ने कहा- वेंटीलेटर पर हरकत हुई और फिर...
सफदरजंग अस्पताल में बर्न और प्लास्टिक विभाग के एचओडी डॉ. शलभ कुमार ने बताया कि रात करीब साढ़े आठ बजे वेंटीलेटर पर हरकत हुई और पीड़िता का ब्लड प्रेशर गिरने लगा। डॉक्टरों ने एक साथ दवाओं की डोज शुरू की, साथ ही उसके हाथ पैरों को मलना शुरू किया।
इससे रात 9.25 बजे ब्लड प्रेशर थोड़ा ठीक हुआ, लेकिन 11.10 पर फिर से हालत बिगड़ी, आनन फानन में डॉक्टरों की टीम ने उसे दो इंजेक्शन दिए लेकिन 11.30 पर कार्डियक अटैक आने से उसकी धड़कनों की गति कम होने लगी और ब्लड प्रेशर भी कम होता गया। इसके बाद 11.40 मिनट पर पीड़िता को मृत घोषित कर दिया गया।