मेले में रविवार शाम सांस्कृतिक संध्या के तहत चौपाल पर विदेशी कलाकारों ने समां बांधा। सबसे पहले मिश्र के कलाकारों ने अल-सायरा लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद तजाकिस्तान के कलाकारों ने कोमोज वाद्य यंत्रों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। कुछ जगह हरियाणा के लोगों के साथ कुछ विदेशी पर्यटक ताश खेलते भी दिखे।
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- फोटो : अमर उजाला
पुलिस कंट्रोल रूम के सामने डाक विभाग की ओर से मेले में पगड़ियों को सजाकर सेल्फी प्वाइंट बनाया गया है। पंद्रह से ज्यादा प्रकार की पगड़ियां यहां सजाई गई हैं। इन पगड़ियों को पहनकर विदेशी पर्यटक भी सेल्फी लेने में पीछे नहीं है। वहीं, कॉलेज स्टूडेंट्स को भी यह काफी लुभा रहा है। कुछ विदेशी सैलानियों ने हरियाणा के क्षेत्रीय गानों पर जमकर डांस किया।
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इसके अलावा, किर्गीस्तान, तजाकिस्तान, तंनजानियां, जिमबावे के कलाकारों ने भी कार्यक्रम प्रस्तुत किया। मिश्र के राजदूत हातिम तागेलदिन ने कार्यक्रम की शुरुआत की। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन गुरुप्रसाद महापात्रा ने भी सांस्कृतिक कार्यकमों का आनंद लिया व कलाकारों की हौसलाअफजाई की।
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बरसाने की मोरकुटी में मोर बन आयो मेरा रसिया... द्वारा भगवान कृष्ण के राधा के प्रति प्रेम को दर्शाते मयूर नृत्य के अलावा फाग खेलन बरसाने में आए हैं नटवर नंद किशोर...एवं रसिया की रसीली बन जाउंगी...जैसे गीतों पर कलाकारों ने सोमवार को चौपाल को बृज के रंग में रंग दिया।
इसके बाद हरियाणा का लोकनृत्य पेश किया गया। एक कलाकार ने दूध दही का हरियाणा, यो म्हारा हरियाणा...गाना शुरू किया तो वहां बैठे विदेशी सैलानी और कलाकार भी झूमने लगे।