खड़े होने, बैठकर उठने या कुछ उठाने में हाथों और पैरों में कमजोरी महसूस हो, चेहरे व त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई दे तो सचेत हो जाएं, यह दुर्लभ रोग डर्मेटोमायोसाइटिस हो सकता है। इस रोग में कंधे और कूल्हे की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है।
दंगल फिल्म में आमिर खान की छोटी बेटी जूनियर बबीता फोगाट की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री सुहानी भटनागर को भी यही रोग था। एक दिन पहले इस बीमारी से उनका निधन हो गया।
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सुहानी भटनागर
- फोटो : सोशल मीडिया
विशेषज्ञों की माने तो यह एक ऑटो इम्युनिन रोग है। यह काफी दुर्लभ बीमारी है। यह रोग महिलाओं में ज्यादा होने की आशंका रहती है। युवा या 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह बीमारी होने की आशंका ज्यादा रहती है। इस रोग से जुड़े लक्षण दिखने पर मांसपेशी की बायोप्सी व कुछ खून की जांच की जाती है।
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जायरा वसीम और सुहानी भटनागर
- फोटो : सोशल मीडिया
दिल्ली एम्स के रूमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर डॉ. उमा कुमार ने कहा कि दवाइयों से इस रोग का इलाज संभव है। केवल पांच फीसदी मरीज में ही यह रोग गंभीर होता है। इस रोग में शरीर के दूसरे हिस्सों की मांसपेशियों में भी प्रभाव पड़ता है। इस कारण समस्या बढ़ सकती है।
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आमिर खान-सुहानी भटनागर
- फोटो : सोशल मीडिया
इसके अलावा डॉक्टर रोगी की स्थिति के आधार पर आगे की जांच भी करते हैं जिससे पता चलता है कि कैंसर तो नहीं बन रहा। महिलाओं में स्तन सहित अन्य कैंसर रोग बनने की आशंका रहती है। इस रोग का असर समय के साथ आगे चल कर लंग्स, किडनी, आंत, दिल सहित अन्य अंगों पर भी पड़ता है।
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सुहानी भटनागर
- फोटो : अमर उजाला
इन कारणों से बढ़ता है रोग
ऑटो इम्युन रोग शरीर के इम्युन सिस्टम की खराबी है। इसमें शरीर खुद के टिशू पर हमला करता है। ऐसे रोग को लेकर शोध चल रहा है। लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन सा डिसऑर्डर विकसित होता है और शरीर का कौन सा हिस्सा प्रभावित होता है।
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सुहानी भटनागर
- फोटो : सोशल मीडिया
इनमें रहती है आशंका
-युवा या 50 साल से अधिक
-महिलाओं में रहती है ज्यादा आशंका
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सुहानी भटनागर
- फोटो : इंस्टाग्राम
दिखते हैं लक्षण
- कंधे व कूल्हे के आसपास की मांसपेशियों में कमजोरी
- त्वचा सहित शरीर के दूसरे हिस्से में चकत्ते पड़ना
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सुहानी भटनागर
- फोटो : social media
एम्स में मरीज का चल रहा है इलाज
एम्स में रूमेटोलॉजी विभाग में मायोसाइटिस के मरीजों का इलाज होता है। डर्मेटोमायोसाइटिस इन्हीं रोग में से हैं। इसमें त्वचा से जुड़ी परेशानी होती है। जबकि शरीर के अन्य अंगों के आधार पर मायोसाइटिस रोग बदल जाते हैं।
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सुहानी भटनागर
- फोटो : सोशल मीडिया
जांच के होती है बायोप्सी
लक्षण दिखने के बाद जांच के लिए मरीज की मांसपेशी बायोप्सी की जाती है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग मांसपेशियों के ऊत्तकों से जुड़े रोगों के निदान के लिए किया जाता है। इसमें मांसपेशी से केवल ऊतक का एक छोटा सा टुकड़ा निकाला जाता है और उसकी जांच होती है।
यह होती है दिक्कत
सांस लेने की मांसपेशी कमजोर - सांस लेने में दिक्कत
खाना निगलने की मांसपेशी कमजोर - खाना निगलने में दिक्कत, नाक से निकल जाता है खाना
दिल की मांसपेशी कमजोर - दिल से जुड़ी बीमारी
अन्य-इंफेक्शन, निमोनिया व अन्य रोग होने की आशंका