...और इस बार चूक गया मुन्नी बजरंगी, हमेशा की तरह किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया और उसकी मौत हो गई। जी हां ऐसे कई मौके आए जब मुन्ना बजरंगी पुलिस को चकमा देकर भागने में कामयाब हो गया। 11 सितंबर 1998 को तो दिल्ली पुलिस व यूपी एसटीएफ ने दिल्ली के समयपुर बादली इलाके में लगभग उसे मार ही गिराया था।
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munna
इस एनकाउंटर के बाद उसकी मौत की खबर भी टीवी पर चला दी गई, लेकिन मौत का मात देते हुए मुन्ना बजरंगी ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पहुंचते ही आंख खोल दी। इलाज के बाद उसकी जान तो बच गई, लेकिन एक गोली उसके दिल के पास हमेशा के लिए रह गई। डॉक्टरों ने उस गोली को निकाला नही। इधर 29 अक्तूबर 2009 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मुंबई के मलाड से मुन्ना बजरंगी को दबोचा। तभी से वह अलग-अलग जेल में रह रहा था।
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Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूपी, बिहार, दिल्ली और मध्य प्रदेश में मुन्ना बजरंगी की अपराधिक गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इस बीच 11 सितंबर 1998 में दिल्ली के एसीपी राजबीर सिंह व अन्यों को सूचना मिली कि मुन्ना बजरंगी मारुति इस्टीम कार से जीटी करनाल रोड के पास नंगली पूना के सामने अपने साथी के साथ आने वाला है। यूपी एसटीएफ भी इसमें शामिल हो गई।
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Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस की टीम ने दोनों को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद आरोपियों ने पुलिस टीम पर गोली चला दी। एसीपी राजबीर की टीम ने जवाबी गोलीबारी की, जिसमें मुन्ना का साथी यतिंदर सिंह मारा गया, जबकि मुन्ना को 11 गोली लगी।
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Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
वहीं गोली बारी में दिल्ली पुलिस का सिपाही देवेंद्र सिंह जख्मी हो गया। इस हमले में लगभग मुन्ना को मरा हुआ समझकर पुलिस की टीम उसे आरएमएल अस्पताल लेकर गई, जहां उसकी सांस चल रही थी। बाद में उसकी जान बच गई। समयपुर बादली थाने में मामला दर्ज किया गया। कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेज दिया गया, बाद में वह जमानत पर छुट गया। लेकिन वह दुबारा कोर्ट नहीं गया, 20 मई 2002 को अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया।
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Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस के मुताबिक 2002 से 2009 के बीच मुन्ना बजरंगी ने ताबड़तोड़ कई लोगों की हत्या कर दहशत फैला दी। सूत्रों का कहना है कि मुन्ना 150 से अधिक कांट्रेक्ट किलिंग में शामिल रहा। यहां तक अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम से भी उसके संबंधों की चर्चा होने लगी। दिल्ली में भी मुन्ना ने रंगदारी शुरू कर दी।
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munna bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
दूसरी ओर 2009 में स्पेशल सेल के एसीपी राजबीर सिंह की गुरुग्राम में हत्या हो गई। पुलिस सूत्रों की मानें तो उस हत्याकांड की साजिश में भी उसका नाम आया। दिल्ली पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी। इस बीच एक सूचना के बाद पुलिस ने आरोपी को मुंबई के मलाड़ से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद से ही वह अलग-अलग जेलों में रह रहा था।
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मुन्ना बजरंगी
- फोटो : अमर उजाला
शरद सेठी के जरिए अंडरवर्ल्ड में कदम रखा था दिल्ली पुलिस अधिकारियों की मानें तो बाहुबली मुख्तियार अंसारी के करीब आने के बाद मुन्ना बजरंगी गुजरात केकुख्यात माफिया अनिरुद्व सिंह जडेजा केसम्पर्कमें आया। अनिरुद्व ड्रग, सोना व हथियारों की तस्करी करता था। जडेजा ने ही उसे एके-47 दी थी, जिसका बजरंगी ने सबसे पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रयोग किया।
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घरों में कैद हो गए, खिड़कियां तक नहीं खोली
- फोटो : amar ujala
इसके बाद वह दाउद इब्राहिम शरद सेठी केसम्पर्क में आया। शरद सेठी ने ही उसे अंडर वल्र्ड में कदम रखवाया। इसके बाद इसने मुंबई में हत्या व अपहरण की कई वारदातों को अंजाम दिया। यहां उसने बोरीवाली में मकान खरीदा, शादी की और यहीं रहने लगा। वर्ष 1998 में दिल्ली पुलिस को पता लग गया कि बजरंगी मुंबई में है। इसकेबाद ये करनाल में आ गया। इस दौरान एसीपी राजवीर सिंह की टीम के साथ उसकी मुठभेड़ हुई।
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मुन्ना के गुर्गों ने सुरक्षा घेरा बना रखा
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एसीपी राजवीर के रहते उसने दिल्ली में कदम नहीं रखा दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार एसीपी राजवीर जब तक जिंदा रहा तब तक मुन्ना बजरंगी ने दिल्ली में कदम नहीं रखा। उसे लगा कि राजवीर से मुठभेड में ढ़ेर कर देगा। समयपुर बादली में यूपी एसटीएफ केसाथ एसीपी राजवीर केटीम ने उसे दबोचा। इसकेबाद एसीपी राजवीर ने उसे फिर घेरा, मगर दूसरी बार भी वह बच निकला।
दिल्ली में दो मुन्ना बजरंगी के खिलाफ दो मामले दर्ज...
दिल्ली पुलिस अधिकारियों की मानें तो मुन्ना बजरंगी के खिलाफ दिल्ली के समयपुर बादली इलाके में पुलिस पर जानलेवा हमला करने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और ड्यूटी के दौरान हमला करने का मामला दर्ज था। वहीं 2009 में स्पेशल सेल के थाने में उसके खिलाफ अपराधिक षडयंत्र रचना का भी मामला दर्ज था। इसके बाद उसके खिलाफ कोई भी मामला दर्ज नहीं था। हालांकि उसने दिल्ली के कई बड़े कारोबारियों से रंगदारी मांगी थी। लेकिन उसको रिपोर्ट नहीं कराया गया था।