स्कूल जाने वाली लड़कियों को सोशल मीडिया पर ऐसे बनाया जा रहा शिकार, डराने वाली है सच्चाई
Sun, 14 May 2017 09:23 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
सार
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गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं और अब बच्चों के पास इंटरटेनमेंट के लिए ज्यादा समय है। ऐसे में बच्चों का सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त बिताना स्वाभाविक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोशल मीडिया पर बच्चों को निशाना बनाने के लिए एक खतरनाक साजिश रची जा रही है। (ये भी पढ़ें: इंटरनेट पर लड़कियों को फंसाने का निकाला नया तरीका, 25% बढ़ गया जिस्मफरोशी का धंधा)
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रितिका शर्मा (परिवर्तित नाम) का पिछले कई दिनों से फेसबुक, वाट्सऐप और स्नैपचैट पर एक शख्स पीछा कर रहा था और बातचीत न करने पर सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दे रहा था।
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परेशान रितिका ने आखिर अपने भाई से अपनी परेशानी शेयर की। भाई ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी शिकायत पुलिस में कर दी। पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया और पेरशान करने वाले शख्स की तलाश शुरू कर दी है।
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रितिका ने पुलिस को बताया कि उसके ही एक दोस्त ने राहुल सिन्हा नाम के इस शख्स से उसकी मुलाकात कराई थी। जल्द ही रितिका उससे वाट्सऐप पर बातचीत करने लगी।
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इस दौरान रितिका ने अपने घर का पता, स्कूल का नाम और ट्यूशन जाने की टाइमिंग भी उसे बता दी। जल्द ही रोहित उप पर डेट के लिए दिल्ली से बाहर चलने का दबाव डालने लगा।
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इसके बाद रितिका ने रोहित का नंबर ब्लॉक कर दिया और फेसबुक, वाट्सऐप, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट पर उससे बात करना बंद कर दिया। इसके बाद रोहित ने इन साइट्स पर उसका पीछा करना शुरू कर दिया उसे धमकाने लगा। तब रितिका ने अपने भाई से सारी बात बताई।
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साइबर क्राइम पर काम करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों के बीच इलेक्ट्रॉनिक कम्यूनिकेशन के साधनों जैसे की ई-मेलिंग, सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इन प्लेटफॉर्म पर बच्चों को परेशान करना या उन्हें किसी काम के लिए उकसाना बेहद आसान है।
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दिल्ली पुलिस ने अपने सर्वे में पाया है कि साइबरक्राइम की शुरूआत डराने-धमकाने से होती है और जल्द ही ये पीछा करने, छेड़छाड़ और बलात्कार तक पहुंच जाता है। चौंका देने वाली बात ये है कि इस तरह के ज्यादातर अपराध के शिकार दिल्ली के प्राईवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे हो रहे हैं जो सोशल मीडिया पर अक्सर सक्रीय रहते हैं।
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- फोटो : File Photo
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मधुर वर्मा का कहना है कि स्कूल जाने वाले 90 फिसदी से ज्यादा बच्चे फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं और पिछले कुछ सालों में वाट्सऐप, इंस्ट्राग्राम और स्नैपचैट का इस्तेमाल भी बच्चों में तेजी से बढ़ा है।
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- फोटो : self
पुलिस का कहना है कि साइबर बुलिंग या साइबर क्राइम के ऐसे मामले में जिनका शिकार स्कूल जाने वाले बच्चे होते हैं वो दर्ज ही नहीं हो पाते क्योंकि बच्चे पुलिस में शिकायत करने नहीं जाते।
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- फोटो : Astute Media
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने साइबर बुलिंग और साइबर क्राइम से बच्चों को बचाने के लिए 400 से ज्यादा स्कूलों में साइबर सेफ्टी जागरुकता अभियान भी चलाया था।
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सोशल मीडिया
- फोटो : amar ujala
दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक अप्रैल 2014 से अब साइबर क्राइम से संबंधित 508 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं जिसमें से 244 मामले आईपीसी की आईटी एक्ट के तहत दर्ज किए गए हैं।
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चौंकाने वाली बात ये है कि साइबर क्राइम के कुल दर्ज केस में से 26 मामले यौन उत्पीड़न के हैं। चूंकि अब बच्चों की गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं ऐसे में उनके बीच सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे समय में इन बच्चों के साइबर क्राइम का शिकार होने की संभावना भी ज्यादा होती है।
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- फोटो : डेमो फोटो
एक वरिष्ठ पुलिस आधिकारी का कहना है कि साइबर क्राइम के ज्यादातर मामलों में अपराधी अपने शिकार का परेशान करने के लिए अश्लील मैसेज, फोटो और वीडियो का सहारा लेते हैं।
बच्चों सहित मां-बाप के लिए भी चौंका देने वाली बात ये है कि 70 ये 75 फीसदी मां-बाप और बच्चे इस बात से अनजान हैं कि बच्चों के लिए पुलिस की एक हेल्पलाइन नंबर 1098 है जिसपर किसी भी समय शिकायत कर मदद मांगी जा सकती है। दिल्ली पुलिस द्वार शुरू किए गए साइबर अवेयरनेस कार्यक्रम के तहत बच्चों को बताया जाता है कि कैसे सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ वो अपनी किसी भी पर्सनल जानकारी को शेयर करने से बच सकते हैं।