पठानकोट एयरबेस में एक अंधेरे कमरे में छुपे आतंकियों ने सर्च ऑपरेशन चला रही एनएसजी कमांडो की टीम पर अचानक हमला बोल दिया। आतंकी हैंड ग्रेनेड और ताबड़तोड़ गोलियां बरसा रहे थे। एनएसजी टीम का हर जवान बुरी तरह से जख्मी था, मगर वे मोर्चे पर डटे रहे। एक भी आतंकी को रिहायशी इलाके में नहीं घुसने दिया। (सभी फोटो : कुशाग्र/अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद)
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पठानकोट का हीरो पहुंचा घर, आंख गंवा बचाई 2500 जानें
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चंद कदम पर स्थित रिहायशी इलाके में अगर आतंकी घुस जाते थे तो 2500 लोगों की जान पर बन आती। वसुंधरा निवासी कमांडो राजेश नेगी (32) की आंख, छाती, पेट और पैर में छर्रे लगे। राजेश नेगी की बायीं आंख डॉक्टर नहीं बचा सके। राजेश नेगी ने यह आंखों देखी बयान की तो वहां मौजूद हर किसी ने उनके हौसले को सैल्यूट किया। सोमवार को वसुंधरा स्थित घर पहुंचने पर आरडब्ल्यूए ने उनका जोरदार स्वागत किया।
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वसुंधरा सेक्टर-4 निवासी राजेश मानेसर स्थित एनएसजी कैंप में तैनात हैं। आतंकी हमले की रात उनकी टीम पठानकोट पहुंच गई थी। उनकी टीम के जिम्मे एयरबेस में बने रिहाइशी इलाके की सुरक्षा थी। तीन जनवरी की सुबह नौ बजे रिहाइशी क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चल रहा था। कुछ दूरी पर बने एक कमरे में आतंकी छिपे थे। कमरे में अंधेरा होने की वजह से अंदर की गतिविधि नहीं दिख रही थी। इसी बीच उनकी टीम पर आतंकियों ने हैंड ग्रेनेड से हमला बोल दिया।
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दूसरी टीम के पहुंचने तक उन्होंने मोर्चा संभाले रखा और आतंकियों को रिहायशी क्षेत्र में नहीं घुसने दिया। वसुंधरा सेक्टर-4 ए की आरडब्ल्यूए ने सोमवार को कमांडो राजेश का स्वागत किया। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे वह पत्नी यशोदा नेगी के साथ सोसायटी पहुंचे। उन्हें फूलमाला पहनाकर लोगों ने जिंदाबाद के नारे लगाए। रेजिडेंट्स ने उनके जज्बे को सलाम किया। बेटे को देखकर मां हेमा नेगी की आंख से आंसू छलक गए। उनकी नानी राधिका देवी भी राजेश से मिलने गांव से आईं थीं।
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बेटा आरव (7) भी दादी के साथ पिता का इंतजार कर रहा था। आरडब्ल्यूए ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर राजेश के परिवार को आर्थिक मदद देनेे की मांग की है। इस मौके पर आरडब्ल्यूए अध्यक्ष डॉ. अनुज त्यागी, पुनीत भट्ट, पान सिंह बिष्ट, गीता शर्मा, श्वेता शर्मा, सीबी सक्सेना आदि मौजूद रहे।
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कमांडो राजेश के पिता हर्ष सिंह नेगी आर्मी से रिटायर्ड हैं। उन्हें दो जनवरी को ही पता चल गया था कि बेटा पठानकोट एयरबेस में है। वह टीवी पर वहां की पल-पल की खबर ले रहे थे। जब तीन जनवरी को सुबह एनएसजी कमांडो के घायल होने की खबर आई तो उनकी चिंता बढ़ गई। मगर बेटे से संपर्क नहीं हो सका।
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करीब 30 घंटे बाद चार जनवरी की शाम पांच बजे राजेश का फोन आया और दिल्ली के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि बेटे पर उन्हें गर्व है। देश की रक्षा के लिए उनका परिवार हमेशा तैयार है।