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चोर के हाथ में था ब्लेड फिर भी उससे छीना पापा का मोबाइल

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दिल्ली कितनी असुरक्षित है, इसका अंदाजा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चयनित छत्तीसगढ़ की 10 वर्ष आठ माह की जोएना चक्रबोरती को भी हो गया है। इस बच्ची ने दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में निर्भीकता और साहस से चोर का सामना किया। (सभी फोटोः विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली)
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चोर के हाथ में था ब्लेड फिर भी उससे छीना पापा का मोबाइल

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वह कहती है कि यदि हम सतर्क रहें, तो ऐसी घटनाएं कम हो सकती हैं। आईपीएस ऑफिसर बनने की तमन्ना रखने वाली जोएना को काफी लोगों ने चोर के पीछे ना भागने की सलाह दी थी, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी।
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जोएना बताती है कि वह वर्ष 2014 नवंबर में अपनी मां के केंद्रीय विद्यालय में विभागीय साक्षात्कार के लिए दिल्ली आई थी। वह अपने माता-पिता के साथ पहाड़गंज इलाके के एक होटल में ठहरी हुई थी।

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27 नवंबर 2014 शाम को जब वह अपने पिता के साथ सड़क पार कर रही थी, तभी एक बदमाश उसके पिता का मोबाइल छीनकर भागने लगा। जोएना ने हिम्मत दिखाते हुए वाहनों को रोकते हुए बदमाश का पीछा करना शुरू किया।
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अंतत: उसने उसकी टांग पकड़ ली और मदद के लिए चिल्लाने लगी। बदमाश के हाथ में ब्लेड देखकर सभी डरे हुए थे, लेकिन जोएना की बहादुरी को देखते हुए उसके पिता व अन्य लोगों ने बदमाश को पकड़ लिया।
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मोबाइल वापस मांगने पर बदमाश ने मोबाइल कवर फेंका, तो जोएना बदमाश के ऊपर मोबाइल देने के लिए चिल्लाई। आखिर चोर को फोन वापस करना पड़ा। सातवीं कक्षा की छात्रा पहली बार ही दिल्ली आई थी और उसे ऐसा अनुभव प्राप्त हुआ। वह कहती है कि उस समय मुझे बस यह लगा कि उसने गलत काम किया है, इसलिए मुझे उसे पकड़ना है।
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अदम्य साहस व वीरता का परिचय देने वाले देश के 25 बच्चों को वर्ष 2015 के राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है। इन बच्चों में 22 लड़के व तीन लड़कियां शामिल हैं।

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इनमें से महाराष्ट्र के गौरव कवडूजी सहस्त्रबुद्धे व उत्तर प्रदेश के शिवांश सिंह को मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया जाएगा। गणतंत्र दिवस से पहले 24 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन सभी बच्चों को पुरस्कृत करेंगे। जिसके बाद ये बच्चे गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लेंगे।

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राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों में सबसे खास भारत अवार्ड महाराष्ट्र के 15 वर्ष 10 माह के गौरव कवडूजी सहस्त्रबुद्धे को दिया जाएगा। गौरव ने साहस का परिचय देते हुए चार जीवन को बचाने की खातिर अपने प्राणों की आहुति दे दी।

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गीता चोपड़ा अवार्ड तेलंगाना की आठ वर्ष एक माह की शिवमपेट रुचिता को दिया जाएगा। वीरता पुरस्कार पाने वाली रुचिता सभी बच्चों में सबसे कम उम्र की हैं। उन्होंने रेलवे क्रॉसिंग पर रेलगाड़ी की बस में टक्कर से पहले साहस व दृढ़ता का परिचय देते हुए दो जिंदगियों को बचाया।

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संजय चोपड़ा अवार्ड उत्तराखंड (गढ़वाल) के 16 वर्षीय अर्जुन सिंह को दिया जा रहा है। उन्होंने अपनी मां को बाघ के हमले से बचाया था। वहीं, बापू गेधानी अवार्ड केरल के 12 वर्ष चार माह के एरोमल एस एम, मिजोरम के 15 वर्ष 3 माह की रामदिनथारा, गुजरात के 13 वर्षीय राकेशभाई शनाभाई पटेल को दिया जाएगा।

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वीरता पुरस्कार से सम्मानित होने वाले अन्य बच्चों में महाराष्ट्र के नौ वर्ष 2 माह के निलेश रेवाराम भिल, छत्तीसगढ़ की 10 वर्ष आठ माह की जोएना चक्रवर्ती, उत्तर प्रदेश की 10 वर्ष 11 माह के भीमसेन उर्फ सोनू।

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गुजरात के 10 वर्ष 9 माह की कशिश धनानी, महाराष्ट्र के 9 वर्ष 8 माह के वैभव रामेश्वर घंगारे, हरियाणा पंचकूला के 12 वर्ष सात माह के दिशांत मेहंदीरत्ता, मणिपुर के 12 वर्ष 11 माह के चोंगथाम कुबेर मेतैई, मेघालय की 13 वर्ष 2 माह की एंजेलिका टिनसांग।

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महाराष्ट्र के 14 वर्ष 7 माह केमोहित महेंद्र दलवी, केरल के 13 वर्ष 7 माह के  नितिन फिलिप मैथ्यू, छत्तीसगढ़ के 15 वर्ष 7 माह के सर्वानंद साहा, केरल के 14 वर्ष 9 माह के बीधोवन और14 वर्ष सात माह के आनंदु दिलीप।

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मणिपुर के 14 वर्ष आठ माह के मॉरिस येंगखाम, केरल के 15 वर्ष एक माह के अभिजीत केवी, तेलंगाना के 14 वर्ष 11 माह के साईं कृष्णा अखिल किलांबी, केरल के 14 वर्ष एक माह के मोहम्मद शमनाद, ओडिशा के 17 वर्ष नौ माह के अविनाश मिश्रा व उत्तर प्रदेश के 13 वर्ष नौ माह के शिवांश सिंह शामिल हैं।
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इन बच्चों को अधिकतम पचास हजार रुपये व न्यूनतम 20 हजार रुपये की राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जाएगी। वर्ष 1957 से अब तक कुल 920 बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।
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