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इन विधवाओं के इस सवाल का जवाब राहुल के पास भी नहीं होगा!

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जब हमारे तीन मारे गए तो राहुल गांधी कहां थे? उस वक्त उन्हें हमारी और बच्चों की याद नहीं आई। ये जो आज नेता यहां आकर अपनी राजनीतिक रोटी सेक रहे हैं, उस समय कहां सो गए थे? यह सवाल वे तीन महिलाएं कर रही हैं जो एक साल पहले दलितों की ओर से की गई चाकूबाजी में अपने पतियों को गवां चुकी हैं। (सभी फोटो: ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद)
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इन विधवाओं के इस सवाल का जवाब राहुल के पास भी नहीं होगा!

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5 अक्तूबर 2014 को दलितों और सवर्णों में मोबाइल को लेकर विवाद हो गया था। आरोप है कि अगले ही दिन दलित परिवार के लोगों ने चाकूबाजी कर सवर्ण परिवार के पप्पू उर्फ मोहनलाल, पप्पी उर्फ इंद्राज और बालू उर्फ भरतपाल की हत्या कर दी थी।

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तीनों की विधवाएं कविता, नीरज और बबिता का कहना है कि हमारे केस को दबाने के लिए ये साजिश रची गई है।

इन विधवाओं के इस सवाल का जवाब राहुल के पास भी नहीं होगा!

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दले की भावना से उनके परिवार को उजाड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनके तीन-तीन, चार-चार बच्चे हैं, उनका पालन पोषण कैसे करें।
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जमीन तक बिक चुकी है। उनके आदमियों को मार दिया गया तब किसी नेता को उनकी सुध लेने की फुर्सत नहीं मिली और न ही दस रु पये का मुआवजा दिया।

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यहां रहने वाला कोई दलित गरीब नहीं हैं, बल्कि दबंग हैं। मिया-बीबी के  झगड़े में ये घटना हुई है।

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इसका हमें भी दुख है। क्योंकि बच्चों का कोई कसूर नहीं होता। तीनों का कहना है कि उन्हें मुआवजा नहीं इंसाफ चाहिए।
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