अरावली क्षेत्र के अंतर्गत सूरजकुंड और सेक्टर-55 थाना क्षेत्रों में बनीं कृत्रिम झीलों की जानकारी गूगल पर से हटाने की तैयारी चल रही है। पुलिस की मानें तो दिल्ली-एनसीआर समेत दूसरे शहरों से पिकनिक मनाने वाले छात्रों का ग्रुप गूगल पर सर्च करने के बाद ही यहां तक पहुंचता है। उसके बाद छात्र नहाने के लिए इन झीलों में जाते हैं और डूब जाते हैं। आए दिन होने वाली घटनाएं पुलिस के लिए सिरदर्द बन गई हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो आठ सालों में अब तक 44 से ज्यादा लोगों की मौत झीलों में डूबने से हुई है।
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तस्वीरें: गूगल से हटेगी इन खूनी झीलों की कहानी
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ज्ञात हो कि अरावली की पहाड़ियां दिल्ली-एनसीआर का एडवेंचर पिकनिक स्पॉट के रूप में जाना जाता है। यहां एडवेंचर का आनंद लेने के लिए कई इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों के विद्यार्थी ग्रुप में पिकनिक मनाने आते हैं। पहाड़ियों के बीच बनी खूनी झीलों में शांत वातावरण और नीला पानी आने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां आने वाले लोग इस बात से अनजान रहते हैं कि यह झीलें जितनी आकर्षक हैं, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक भी हैं।
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दरअसल गूगल पर सर्च करने के बाद लोगों को अरावली की पहाड़ियों और कई झीलों के बारे में जानकारी मिलती है। दिल्ली-एनसीआर में होने के कारण लोग बाहर कहीं जाने के बजाय यहां आना पसंद करते हैं। हालांकि पुलिस ने घटनाओं को देखते हुए झीलों की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर रखा है। सुंदर प्राकृतिक छटा देखकर ही लोग यहां आने को मजबूर होते हैं। पुलिस का मानना है कि जब गूगल से झीलों की जानकारी हटा दी जाएगी तो लोग यहां नहीं आएंगे और घटनाएं भी नहीं होंगी।
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अरावली की पहाड़ियों में अवैध रूप से की गई माइनिंग के दौरान पहाड़ों को खोद कर पत्थर चोरी किया गया था। बारिश से इन गड्ढों में पानी भर गया और फि र इन गड्ढों ने झीलों का रूप ले लिया है। -मानव रचना विश्वविद्यालय के सामने अरावली की पहाड़ियों में पांच झीलें बनी हुई हैं -कांत एन्क्लेव के पास दो झीलें बनी हुई हैं -गांव धौज में एक झील बनी हुई है
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सूरजुंड थाना इंचार्ज के मुताबिक गर्मी के दिनों में ज्यादातर छात्र मस्ती करने इन झीलों पर आते हैं। कई बार तो दो से तीन दोस्त भी डूब चूके हैं। पिछले छह माह में पांच मौतें इन झीलों में डूब कर हो चुकी हैं। वहीं एसीपी कहते हैं कि झील की ओर जाने वाले रास्ते में अवरोधक, सूचना बोर्ड लगवाया गया है। इन झीलों तक कोई वाहन लेकर नहीं जा सकता है।
सिर्फ पैदल ही वहां तक पहुंचा जा सकता है। ऐसे में युवाओं को रोका जाना मुश्किल है। घटनाओं को देखते हुए गूगल प्रबंधन से बात कर इन झीलों के बारे में जानकारियों को हटवाया जाएगा।