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पन्ना भरतराम थिएटर फेस्टिवल के अंतिम दिन हुआ गिरीश कर्नाड के नाटक ‘अग्नि और बरखा’ का मंचन

Sat, 29 Dec 2018 05:04 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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noida play - फोटो : अमर उजाला
साल के आखिरी सप्ताह में श्रीराम सेंटर के सालाना थिएटर फेस्टिवल ’पन्ना भरतराम थिएटर फेस्टिवल’ का आयोजन किया गया। पिछले शनिवार को शुरू हुए इस रंगमंच उत्सव ने दिल्लीवासियों को पूरे सप्ताह उत्साहित करते हुए जश्न मनाने का मौका दिया। ‘पन्ना भरत राम थिएटर फेस्टिवल’ का आयोजन श्री राम सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा हर साल किया जाता है और इसे विभिन्न प्रोडक्शन्स का समर्थन प्राप्त है। इस फेस्टिवल की अवधारणा उत्कृष्टता और एक्सप्लोरेशन के आधार पर तैयार की गई थी, और इसी के अनुरूप इसमें बेहद प्रशंसनीय, पुरस्कार विजेता प्रोडक्शन्स की पेशकश की जाती है, जो इसके दर्शकों को बेहतरीन शो देते हैं।
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noida play - फोटो : लाल सिंह
इस वर्ष 22 दिसंबर से शुरू हुए इस उत्सव का समापन आज गिरिश कर्नाड द्वारा लिखे और के.एस. राजेन्द्रन द्वारा निर्देशित नाटक ‘अग्नि और बरखा’ के साथ हुई। यह नाटक एक पुरानी लोककथा पर आधारित है। इसकी कहानी महान ऋषि रैभ्या, उनके पुत्रों परवसु व अरवसु, परवसु के चचेरे भाई यावक्री, परवसु की पत्नी विशाखा और अरवसु की प्रेमिका नीतिलई पर केंद्रित है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे शक्ति का दंभ और पद की लालसा लोगों को सही पथ से भटकाती है। कहानी के अंत में भगवान इंद्र का प्रकट होना और सत्य एवं प्रेम की विजय ही इसका मूल है। इस नाटक को प्रतिष्ठित नाटककार गिरीश कर्नाड ने लिखा है। पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित कर्नाड अभिनेता एवं फिल्म निर्देशक भी हैं।
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noida play - फोटो : लाल सिंह
इससे पूर्व पिछले छः दिनों के दौरान गिरीश कर्णाड़ का तुगलक, जोसेफ केसर्लिंग की आर्सेनिक एवं ओल्ड लेस, मानव कौल का प्रेम कबूतर, निलॉय रॉय का दादू, रबिन्द्र नाथ टैगोर की पोएम ऑफ एन एंडिंग और ख्वाजा अहमद अब्बास का काला सूरज सफेद साये शामिल रहे। विभिन्न विषयों और जीवन के अनमोल पहलूओं से रूबरू कराते इन नाटकों ने थिएटर प्रेमियों को खासा उत्साहित किया और उन्हें गुणवत्ता व उच्च स्तरीय नाटकों को देखने का अवसर प्रदान किया। फेस्टिवल में हर किसी के लिये कुछ-न-कुछ मौजूद रहा और छुट्टियों के मौसम के चलते परिवार वालों और दोस्तों के साथ आनंद उठाने का एक बेहतरीन अवसर रहा पन्ना भरत राम थिएटर फेस्टिवल।

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noida play - फोटो : अमर उजाला
प्रतिष्ठित नाटककार गिरीश कर्नाड द्वारा रचित और के. माडवानी द्वारा निर्देशित ‘तुगलक’ किसी शानदार ऐतिहासिक दस्तावेज का अनुभव रहा। जो सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा अपने साम्राज्य की राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद करने और पुनः दिल्ली करने के सनकभरे फैसले के बाद उपजी स्थिति पर केंद्रित है। ‘तुगलक’ ने व्यक्ति की उम्मीदों और वास्तविकताओं के बीच के अंतर को दिखाया। वहीं मानव कौल द्वारा रचित हिंदी नाटक ‘प्रेम कबूतर’ स्कूली दिनों और किशोर उम्र के प्रेम की यादों को जिंदा करने वाला नाटक रहा।
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noida play - फोटो : लाल सिंह
फेस्टिवल के तीसरे दिन आर्सेनिक एंड ओल्ड लेस का मंचन हुआ, जो कि अमेरिकी नाटककार जोसेफ केसलरिंग का प्रसिद्ध नाटक है। नयन सागर सागर द्वारा निर्देशित इस नाटक की कहानी वसई के डी‘सिल्वा परिवार पर केंद्रित है। यह सनकी लोगों का परिवार है, जिसमें हर सदस्य को हत्या का शौक है। इन सनकी हत्यारों के बीच मानसिक रूप से स्वस्थ बॉबी डी‘सिल्वा के संघर्षों के इर्द-गिर्द बुनी गई कहानी दिखायी गई।
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noida play - फोटो : लाल सिंह
चौथे दिन प्रस्तुत ‘दादू’ एक अकेले व्यक्ति की कहानी थी, जो कठपुतली की कला को पुनर्जीवित करने के प्रयास में लगा है। समय के साथ उसकी हताशा गुस्से के रूप में उभरकर सामने आने लगती है। निलॉय रॉय द्वारा रचित और निर्देशित इस नाटक को दिल्ली में ऑल इंडिया थिएटर फेस्टिवल में पांच श्रेणियों में पुरस्कार मिला था। ख्वाजा अहमद अब्बास द्वारा रचित और लोकेश जैन द्वारा निर्देशित ‘काला सूरज सफेद साये’ कांगो गणराज्य के प्रथम प्रधानमंत्री पैट्रिस लुमुंबा पर केंद्रित था, जिनकी 1961 में हत्या हो गई थी।
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noida play - फोटो : लाल सिंह
नाटक में उनकी आत्मा को दर्शाया गया है जो संयुक्त राष्ट्र में अपनी हत्या और कांगो के साथ हुए अन्याय पर आवाज उठाने पहुंचती है। उत्सव के दौरान छठे दिन गुरु रविंद्रनाथ टैगोर की ‘शेशर कोबिता’ पर आधारित नाटक पोएम ऑफ एन एंडिंग का मंचन हुआ, जो फेस्टिवल का एक मात्र अंग्रेजी नाटक था। पहली बार इसे अंग्रेजी में बतौर नाटक रूपांतरित किया गया था, जो ऑक्सफोर्ड से पढ़े हुए बैरिस्टर अमित रॉय की।
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