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Noonh DSP Murder: पहले विस्फोट... फिर ढुलाई, माफिया ने बदरंग कर दी अरावली की खूबसूरती

Wed, 20 Jul 2022 04:26 AM IST
अनुराग सक्सेना यूनुस अलवी, पुन्हाना (नूंह)
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नूंह में डीएसपी की हत्या। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध खनन रोकने के आदेशों की मेवात में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। दिन-रात माफिया अवैध खनन कर रहे हैं। रात में विस्फोट से पत्थरों को तोड़ा जाता है और फिर ढुलाई की जाती है।

रात में डंपरों और दिन में ट्रैक्टरों का इस्तेमाल होता है। वहीं, जिला प्रशासन की तरफ से इसे रोकने का प्रयास तो किए जाते हैं, लेकिन आरोप लगते रहे हैं कि राजनीतिक संरक्षण आड़े आ जाता है। नूंह जिले में अवैध खनन रोकने के लिए 2014 में आईआरबी के 700 जवान नियुक्त भी किए गए थे, लेकिन माफिया ने तो अरावली की खूबसूरती बदरंग कर दी है।
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अरावली की पहाड़ी का मनोरम दृश्य - फोटो : Social Media
नूंह के साईमीर बास, रवा, शाहचौखा, खानपुरघाटी, झिमरावट, रीठट, खोडबसी, रहना, बाजीदपुर, बडेड, लुहिंगाकला, तुसैनी, महूं, बूबलहेड़ी, तुसैनी सहित दो दर्जन गांवों के पहाड़ों में ट्रैक्टरों द्वारा अवैध खनन हो रहा है, जबकी तावडू खंड के चूहूड़पुर और राजस्थान के अलवर जिले के बालौज, फखरपुर खोयरी आदि गावों में जमकर अवैध खनन हो रहा है।
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अरावली पर्वतमाला - फोटो : Social media
हरियाणा के पहाड़ पर कम और राजस्थान के पहाड़ पर ज्यादा अवैध खनन हो रहा है। इन पहाड़ों से आने वाला पत्थर पास में चल रही क्रेशर मशीन पर ट्रैक्टरों और डंपरों के माध्यम से डाला जाता है, जहां पर कई क्रेशर मशीन लगी हुई हैं। पहाड़ पर दिनभर ट्रैक्टर और जेसीबी मशीन चलती रहती हैं।

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अरावली में हो रहा खनन - फोटो : अमर उजाला
मेवात की लोकल सड़कों पर अवैध खनन से भरे ट्रैक्टर दिनभर देखे जा सकते हैं। लोगों का यह भी आरोप है कि अवैध खनन से भरे ट्रैक्टर इतनी तेज रफ्तार से चलते हैं कि वे किसी आने-जाने वाले को नहीं देखते, जिसकी वजह से अक्सर हादसे हो रहे हैं।
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अरावली वन क्षेत्र में बने आठ फार्म हाउस तोड़े गए - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा में पाबंदी, राजस्थान में खुली छूट

सुप्रीम कोर्ट ने मेवात में पड़ने वाले अरावली पहाड़ पर अवैध खनन पर रोक लगा रखी है, जबकि इसी पहाड़ पर राजस्थान में कोई पाबंदी नहीं है। कुछ अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से यहां अवैध खनन जारी है। खनन माफिया रात के समय बारूद के धमाकों से पत्थर तोड़ने का काम करते हैं और दिन में ट्रैक्टर व डंपरों से ले जाते हैं।
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नूंह में डीएसपी की हत्या। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

जानवर भी लाचार

पत्थर तोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बारूद के धमाकों की वजह से जंगली जानवर भी जंगल छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं। लोगों का कहना है कि पहले यहां बड़ी संख्या में जानवर होते थे, लेकिन अब संख्या बेहद कम रह गई है।
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नियमों की अनदेखी कर अरावली की तलहटी में बनाया जा रहा मकान - फोटो : अमर उजाला

पुलिस की भी मिलीभगत

मेवात पुलिस विभाग द्वारा अवैध खनन के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों से भी साफ पता चलता है कि मेवात में अवैध खनन हो रहा है। ऐसा लगता है कि कुछ पुलिसकर्मी अवैध खनन माफियों से मिले हुए हैं। वर्ष 2011 में डंपर चालकों से अवैध तौर पर पैसे वसूल करने पर तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा राजस्थान के चूहूडपुर गांव के पहाड़ पर करीब 10 साल पहले अवैध खनन की वजह से पांच मजदूरों की मौत हो गई थी। राजस्थान से अवैध खनन का पत्थर मेवात के रास्ते दिल्ली जाता है।
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