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...अगर ऐसा हुआ तो नहीं होगी निर्भया के दोषियों को फांसी, अब भी हैं सजा से बचने के रास्ते

Wed, 18 Dec 2019 05:28 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रुक सकती है निर्भया के दोषियों की फांसी - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को निर्भया के दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जल्द ही निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर लटका दिया जाएगा। हालांकि उन दोषियों को होने वाली सजा की संभावना जरूर बढ़ गई है, लेकिन उनके पास अब भी ऐसे कई विकल्प हैं जो फांसी के रास्ते में रोड़ा बन सकते हैंः
 
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nirbhaya case - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल निर्भया की मां की ओर से पटियाला हाउस कोर्ट में अक्तूबर से ही एक अर्जी विचाराधीन है, जिसमें दोषियों की फांसी का वारंट शीघ्र जारी करने की मांग की गई है। इसपर सुनवाई करते हुए अदालत ने आज डेथ वारंट जारी करने से इंकार कर दिया। इस मामले में सुनवाई के लिए अदालत ने सात जनवरी की तारीख दी है। 
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निर्भया के दोषी - फोटो : Social Media
दया याचिका
दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज हो चुकी है, लेकिन अब उसे राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जा सकता है। अगर राष्ट्रपति दया याचिका स्वीकार कर लेते हैं तो फांसी के रास्ते में बड़ी रुकावट पैदा हो जाएगी। 

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निर्भया के दोषी - फोटो : सोशल मीडिया
वहीं, दूसरी ओर एक दोषी विनय शर्मा ने पहले ही राष्ट्रपति को दया याचिका भेज रखी है, जिस पर अभी कोई फैसला नहीं आया है और जब तक कोई फैसला नहीं आता तब तक दोषियों को फांसी नहीं दी जा सकती। दया याचिका खारिज होने के बाद ही उन्हें फांसी होगी।
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निर्भया के दोषी - फोटो : अमर उजाला
ये भी लगा सकते हैं गुहार
आशंका है कि इस दौरान मुकेश और पवन अदालत से दया याचिका दायर करने की गुहार लगा सकते हैं। ऐसे में अगर अदालत उन्हें याचिका दायर करने की अनुमति देती है तो फांसी कुछ दिन के लिए टल सकती है। 
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निर्भया का मां - फोटो : सोशल मीडिया
हालांकि इस मामले में जेल अधिकारियों का कहना है कि जेल मैन्युअल के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा मिलने के बाद अपील या दया याचिका लगाने के लिए समय सीमा निर्धारित है। अगर उस समय सीमा में दोषियों की ओर से पहल नहीं की जाती है तो जेल प्रशासन कभी भी उनकी फांसी के लिए ब्लैक वारंट की मांग कर सकता है। 
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निर्भया के लिए इंसाफ की मांग करते लोग
इधर दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा है कि वह आज या कल में क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल करेंगे और सुप्रीम कोर्ट के सामने 2017 के बाद के उन सभी 17 मामलों की लिस्ट रखेंगे, जिसमें देश की सबसे बड़ी अदालत ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। क्यूरेटिव पिटीशन दोषी के पास मौजूद अंतिम मौका होता है जिसके द्वारा वह अपने लिए निर्धारित की गई सजा में नरमी की गुहार लगा सकता या सकती है। इसे पुनर्विचार और दया याचिका खारिज होने के बाद दाखिल किया जाता है। अगर इसकी सुनवाई के दौरान अदालत दोषियों के लिए थोड़ी नर्मी दिखाती है, तो उनकी फांसी रुक सकती है, लेकिन इसके बाद दोषी किसी तरह की कानूनी सहायता नहीं ले सकते।
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